Enter your email address:


Subscribe for Latest Schemes of Government via e-mail Daily
Free ! Free ! Free!

Delivered by FeedBurner

माननीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण हो जाने पर वर्ष 2022 तक सभी के लिए आवास की परिकल्पना की है। इस उद्येश्य की प्राप्ति के लिए केन्द्र सरकार ने एंक व्यापक मिशन "2022 तक सबके लिए आवास" शुरू किया है। 25 जून 2015 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस बहुप्रतीक्षित योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम से प्रारम्भ किया है।
Hon’ble Prime Minister envisioned housing for All by 2022 when the Nation completes 75 years of its Independence. In order to achieve this objective, Central Government has launched a comprehensive mission “Housing for All by 2022”. This much awaited scheme has been launched by the Prime Minister of India, Sh. Narendra Modi on 25th June, 2015 as Pradhan Mantri Awas Yojana.

2018-12-16

PM at Prayagraj: inaugurates new Airport Complex, Integrated Command and Control Centre for Kumbh Mela; launches development projects

Sunday, December 16, 2018 0
Prime Minister's Office

PM at Prayagraj: inaugurates new Airport Complex, Integrated Command and Control Centre for Kumbh Mela; launches development projects

Posted On: 16 DEC 2018 5:55PM by PIB Delhi

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, today inaugurated a new Airport Complex, and an Integrated Command and Control Centre for the Kumbh Mela, at Prayagraj. 

The Prime Minister also performed Ganga Pujan, and visited the Swachh Kumbh Exhibition. He visited the Akshay Vat in Prayagraj. He also dedicated to the nation, inaugurated, or laid the Foundation Stone for various development projects at Andawa in Prayagraj.

Addressing a large gathering, he announced that pilgrims for the Ardh-Kumbh this time will also be able to visit the Akshay Vat. He said the Government is making every effort to ensure good connectivity to Prayagraj. He said the projects dedicated today, would help both infrastructure and connectivity. He said the new airport terminal had been completed in a record time of one year. 

The Prime Minister said that every effort is being made to ensure a unique experience for devotees coming for the Ardh-Kumbh.  He said the effort is to showcase India's glorious past, and vibrant future.

The Prime Minister said that the Government is also working to ensure a clean Ganga. He said the sewage treatment plants and beautification of Ghats would go a long way in this regard. 

The Prime Minister described the Kumbh as a symbol of India and Indianness. He said it unites us, and gives a glimpse of Ek Bharat, Shrestha Bharat. He said that the organisation of the Kumbh is not just a matter of faith, but also a matter of prestige, and every visitor to the Kumbh should be well taken care of. He said the Ardh-Kumbh would show how 'New India' encompasses both heritage and modernity. 

The Prime Minister said that he wishes to caution the country that certain forces are trying to put undue pressure on the judiciary. He said these elements consider themselves to be above all institutions. 

***

Source :  PIB

Text of PM’s address at launch of various development projects at Raebareli, UP

Sunday, December 16, 2018 0
Prime Minister's Office

Text of PM’s address at launch of various development projects  at Raebareli, UP

Posted On: 16 DEC 2018 7:12PM by PIB Delhi

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, उत्‍तर प्रदेश के राज्‍यपाल श्रीमान राम नायक जी, उत्‍तर प्रदेश के यशस्‍वी एवं लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ जी, केंद्र में मेरे सहयोगी रेल मंत्री श्रीमान पीयूष गोयल जी, प्रदेश भाजपा के अध्‍यक्ष और संसद में मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र पांडे जी, उत्‍तर प्रदेश के मंत्रि‍परिषद के माननीय मंत्रीगण, यहां उपस्थित विधायकगण, स्‍पीकर महोदय और भारी संख्‍या में पधारे हुए रायबरेली के मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों।
आज मैं उस भूमि पर हूं जिसने  अध्यात्म  से लेकर स्‍वतंत्रता संग्राम के आंदोलन और साहित्‍य से लेकर राजनीति तक देश के हर क्षेत्र में दिशा दिखाई है। ये महाऋषि जमदग्नि समेत अनेक ऋषि-मुनियों के तप की भूमि है तो वीरा पासी, राणा बेनी माधव बख्श सिंह के बलिदान की भूमि है। ये भूमि जायसी के अपनत्व की पर्याय है तो इसी भूमि में महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की रचनाओं ने आकार लिया है। इसी भूमि पर किसान आंदोलन के प्रणेता पंडित अमोल शर्मा हुए, तो इसी भूमि ने राजनारायण जी को भी आशीर्वाद दिया। मैं रायबरेली की इस महान और पुण्‍य भूमि को, यहां के लोगों को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

साथियों, गौरवमयी इतिहास से जुड़े इस क्षेत्र के विकास के प्रति केंद्र और उत्‍तरप्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह से समर्पित है। इसी भावना के तहत थोड़ी देर पहले यहां एक हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। सड़क, घर, मेडिकल कॉलेज जैसी वो सारी परियोजनाएं जिनका थोड़ी देर पहले लोकार्पण और शिलान्‍यास हुआ है वो आप सभी के जीवन को सरल और सुगम बनाने में मदद करने वाला है। इन सभी सुविधाओं के लिए मैं आप सबको ह्दयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों, यहां आने से पहले मैं पास ही में बनी Modern coach factory में था। मैंने इस factory में इस वर्ष बने 900वें डिब्बे को हरी झंडी भी दिखाने का मुझे अवसर मिला। जिस गति से अब वहां काम हो रहा है वो सचमुच में बहुत ही सराहनीय है। पहले की सरकारों की क्‍या कार्य-संस्‍कृति रही है, कैसे देश के साधनों, संसाधनों के साथ अन्‍याय हुआ है, इसकी गवाही रायबरेली की रेल कोच फैक्‍ट्री भी है। आप सोचिए ये फैक्‍ट्री साल 2007 में स्‍वीकृत हुई थी। मकसद था वर्ष में 1000 नए कोच बनाना। साल 2010 में ये फैक्‍ट्री बनकर तैयार भी हो गई। लेकिन उसके बाद चार साल तक इस फैक्ट्रिी में कपूरथला से डिब्‍बे लेकर के उनमें पेच कसने और पेंट करने का काम हुआ। जो फैक्‍ट्री नए डिब्‍बे बनाने के लिए थी उसे पूरी क्षमता से कभी काम ही नहीं करने दिया गया। हालत ये थी कि साल 2014 तक यहां की सिर्फ 3 प्रतिशत मशीनें ही काम कर रही थी, 3 प्रतिशत मशीनें ही काम कर रही थी।

हमनें इस स्थिति को बदला, हमारी सरकार आने के तीन महीने के भीतर यहां से ऐसा कोच निकला जो पूरी तरह रायबरेली की फैक्‍ट्री में बना हुआ था। भाजपा सरकार के प्रयास से अब सारी मशीनें पूर्ण क्षमता के साथ काम कर रही हैं। नई और आधुनिक मशीनों को लगाने का काम भी तेज गति से हो रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले वर्ष इस कोच फैक्‍ट्री से......भईया आपका प्‍यार मेरी सर आंखों पर, आपका उत्‍साह भी मेरी सर आंखों पर लेकिन मेरी आपसे प्रार्थना है कि औरों को भी जरा सुनने दिजिए। इतनी बड़ी तादाद में लोग आए हैं। आपका उत्‍साह, आपका जोश, आपका प्‍यार ये सब मेरा सर आंखों पर, अब आप अनुमति दें तो आगे बोलना शुरू करूं, आगे बोलना शुरू करूं, बोलूं, आपकी इजाज़त के बिना कोई काम मैं नहीं करता। देखिए इतना प्‍यार, इतने आशीर्वाद ये मेरा सौभाग्‍य है और इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। लेकिन मुझे इतनी बड़ी तादाद में लोग आए हैं, उनको भी कुछ बातें सुननी हैं। तो आप कुछ समय के लिए आपके इस उत्‍साह को, इस जोश को थोड़ा संभाल के रखेंगे क्‍या? पक्‍का... वादा...निभाएगें.. शाबाश...। रायबरेली के नौजवान बहुत अच्‍छे हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले वर्ष इस कोच फैक्‍ट्री से 711 नए डिब्‍बे बनकर निकले। अब मैं चाहूंगा कि अगले वर्ष मार्च तक ये संख्‍या बढ़ाकर 1400 के पार की जाए।   

साथियों, इस कोच फैक्‍ट्री के आधुनिकीकरण का काम निरंतर जारी है और अगले दो-तीन वर्ष में नए कोच बनाने की इसकी क्षमता 3 हजार तक पहुंच जाएगी और आपको मैं ये भी बताता हूं, हमारा प्रयास इसे 5000 कोच प्रति वर्ष ले जाने तक का है। इस कोच फैक्‍ट्री के लिए अब जो काम हो रहा है वो इसे भारत की ही नहीं, ये रायबरेली की कोच manufacturing factory दुनिया की सबसे बड़ी रेल कोच फैक्‍ट्री बना देगा। और भाईयो-बहनों मैं छोटा सोचने की आदत ही नहीं रखता। बहुत जल्‍द इस फैक्‍ट्री में देश भर की मेट्रो के डिब्‍बे बनेंगे। Semi High Speed ट्रेनों के डिब्‍बे बनेंगे। एल्‍यूमिनियम के आधुनिक और वजन में हल्‍के और मजबूत डिब्‍बे भी यहीं पर बनेंगे।

भाइयों और बहनों, ये विस्‍तार सिर्फ यहां बनने वाले डिब्‍बों की संख्‍या और कोच फैक्‍ट्री का ही नहीं है। इस विस्‍तार से यहां के लोगों की जिंदगियों में भी एक नया विस्‍तार आया है। अगर कोच फैक्‍ट्री की क्षमता बढ़ेगी तो यहां के युवाओं के लिए हर तरह के रोजगार बढ़ेगें। उस दिन के बारे में सोचिए जब यहां हर रोज दस-बारह नए कोच बनने लगेगे। इस फैक्‍ट्री की क्षमता का विस्‍तार कामगारों, इंजीनियरों, टेक्‍निश्‍यनों, डिप्‍लोमा होल्‍डरस के लिए भी रोजगार के नए अवसर लेकर के आएगा। इतना ही नहीं रायबरेली के लघु और मध्‍यम उद्योगों को भी इसका लाभ मिलेगा।  

भाइयों और बहनों, साल 2014 से पहले इस रेल कोच फैक्‍ट्री के लिए रायबरेली के स्‍थानीय बाजारों से, स्‍थानीय व्‍यापारियों से एक करोड़ रूपये से भी कम का सामान खरीदा जाता था। ये जरा चौंकाने वाली जानकारी आपको दे रहा हूं। बताऊं आपको..बताऊं....हमारी सरकार बनने से पहले इस फैक्‍ट्री को जो सामान लगता था। यहां लोकल लोगों से सिर्फ 1 करोड़ रुपये का सामान खरीदा जाता था। वहीं जरा सुनिये, वहीं भाजपा का सरकार बनने के बाद इस वर्ष, अब तक सवा सौ करोड़ रुपये का सामान रेल कोच फैक्‍ट्री के लिए यहां के स्‍थानीय व्‍यापारियों से खरीद चुकी है।

अब जब फैक्‍ट्री का विस्‍तार होगा तो खरीद का भी आंकड़ा और बढ़ेगा। मुझे बताया गया है कि अब रेल मंत्रालय और यूपी सरकार मिलकर यहां एक रेल इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाने जा रहे हैं। इस इंडस्ट्रियल पार्क के माध्‍यम से रेल फैक्‍ट्री को सामान की सप्‍लाई होगी और इसका सीधा फायदा यहां के लघू और मध्‍यम वर्ग के उद्योगों को मिलेगा।

साथियों, आज एक और तथ्‍य मैं रायबरेली के लोगों के सामने रखना चाहता हूं। जब पहले की सरकार ने यहां पर रेल कोच फैक्‍ट्री का निर्माण किया, तय किया था तो ये भी तय हुआ था कि 5 हजार कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। ये पिछले वाली सरकार ने तय किया था और घोषणा की थी, मालाएं पहनी थी, जिंदाबाद के नारे भी लग चुके थे। लेकिन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि स्‍वीकृति इसके आधे पदों को ही दी गई। घोषणा 5 हजार की और स्‍वीकृति उसके आधे की, इतना ही नहीं 2014 में हमारी सरकार में आने के बाद हमनें ये भी देखा कि यहां की कोच फैक्‍ट्री में एक भी नई नियुक्ति नहीं हुई थी। आपको क्‍या-क्‍या बताया गया था और आपने भी कैसे-कैसे जयकार कर दिया था। एक को भी नहीं मिला था। जो कर्मचारी यहां काम कर रहे थे वो कपूरथला से लाए गए थे।

अब आज की स्थिति ये है कि लगभग 2 हजार नए कर्मचारियों को हमारी सरकार ने नियुक्‍त कर दिया है। इतना ही नहीं, अस्‍थायी कर्मचारियों की संख्‍या भी जहां वर्ष 2014 में सिर्फ 200 थी, अब आज ये बढ़कर लगभग 1500 हो चुकी है। आज मुझे ये कहते हुए गर्व हो रहा है, गर्व का अहसास हो रहा है कि आने वाले समय में रायबरेली रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्‍लोबल हब बनने वाला है।     

साथियों, connectivity को सुदृढ़ करने के लिए देश के लोगों की सुविधाएं बढ़ाने के लिए रेलवे के अलावा हाईवे, एयरवे, वॉटरवे और आईवे हर क्षेत्र पर तेज गति से काम किया जा रहा है। यूपी में नदियों पर बन रहे वॉटरवे हो, आधुनिक एक्‍सप्रेसवे हो या फिर गांव की सड़के जीवन को और आसान बनाने के लिए दिन-रात काम किया जा रहा है। इसी मिशन के तहत रायबरेली में भी हर क्षेत्र में काम तेज गति से आगे बढ़ रहा है। थोड़ी देर पहले ही साढ़े 5 सौ करोड़ रुपए़ की लागत से बने जिस राष्‍ट्रीय राजमार्ग का लोकार्पण किया है उससे रायबरेली, लालगंज से फतेहपुर होता हुआ सीधा बांदा तक जुड़ जाएगा। करीब सवा सौ किलो मीटर के इस राजमार्ग से चित्रकूट धाम पहुंचने में भी सुविधा होगी।

साथियों, Infrastructure का स्‍वास्‍थ्‍य ठीक करने के साथ-साथ सरकार नागरिकों का स्‍वास्‍थ्‍य भी आप सभी को, देश के जन-जन को सस्‍ती और उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। रायबरेली खुद भी स्‍वस्‍थ रहे और पूरे क्षेत्र को स्‍वस्‍थ रखे, इसके लिए यहां पर बन रहे एम्‍स के काम को और गति दी गई है।

आज यहां सवा चार सौ करोड़ रुपये से ज्‍यादा की लागत से बनने वाले मेडिकल कॉलेज, अस्‍पताल और हॉस्‍टल का लोकार्पण और शिलान्‍यास किया गया है। मुंशीगंज में बनने वाला ये मेडिकल कॉलेज और अस्‍पताल यहां के एम्‍स का ही हिस्‍सा है। इसका लाभ पूरे रायबरेली और आस-पास के जिलों को होने वाला है। सरकार स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ घर देने की भी चिंता कर रही है। केंद्र सरकार साल 2022 तक देश के हर गरीब परिवार को पक्‍की छत देने का प्रयास कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक देश में सवा करोड़ से ज्‍यादा घरों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। जिनको घर मिलने वाला है उनको चाबी दे दी गई है। और ये जो दीवाली गई उन्‍होंने अपने नए घर में दीवाली भी मनाई है।

रायबरेली में भी जैसा अभी योगी जी ने बताया अब तक 23 हजार से भी ज्‍यादा घरों की चाबी मेरे गरीब परिवारों को, भाई बहनों को दी जा चुकी है। थोड़ी देर पहले ही 500 और नए घर बनाने की शुरुआत भी की गई है। ये जो घर बन रहे हैं। ये पहले की तरह सिर्फ चारदीवारी नहीं है, हमारा प्रयास है कि हम जो घर बना कर दें, उसमें नल भी हो और नल में जल भी हो, बिजली का कनेक्‍शन भी हो, गैस का कनेक्‍शन भी हो और इज़्जत घर शौचालय तो जरूर हो। 

भाइयों और बहनों, देश के इतिहास में आज का ये दिन एक और वजह से भी बहुत विशेष है। 1971 में आज ही के दिन भारत की वीर सेना ने आतंक, अत्‍याचार और अराजकता की प्रतीक शक्तियों को धूल चटाई थी। इस युद्ध का हिस्‍सा रहे देश भर के सभी सैनिकों को मैं नमन करता हूं। जो सैनिक इस युद्ध में शामिल हुए, शहीद हुए, जिसमें उत्‍तर प्रदेश के भी अनेक वीर सपूत थे उनको भी मैं 130 करोड़ देशवासियों की तरफ से श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

सेना के शौर्य, समर्पण के प्रति दिसंबर के इस सर्द मौसम में भी सरहद पर तैनात अपने प्रहरियों का गौरवगान करने के लिए आप सभी दोनों हाथ उठाकर, मुट्ठी भींचकर मेरे साथ उन वीर जवानों के लिए बोलिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

भाइयों और बहनों, सोचिए, जिस भारत मां की जय के नारे पर आपको गौरव होता है कुछ लोगों को इससे भी शर्मिंदा होते देखा गया है। ये किस तरह के लोग हैं जिन्‍हें भारत माता के जयघोष से दिक्‍कत है, जिन्‍हें देश की परवाह नहीं है?

साथियों, मोदी को उन्‍हें गाली देनी हैं, मैं जानता हूं। मोदी पर वो किसी भी तरह एक दाग लगा देना चाहते हैं, ये भी जानता हूं। लेकिन जानना चाहता हूं कि इसके लिए देश को ताक पर क्‍यों रख दिया गया है? क्‍यों देश की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है?

भाइयों और बहनों, आज देश के सामने दो पक्ष है। एक पक्ष सत्‍य का है, सुरक्षा का है, सरकार का है, जो हर तरफ से कोशिश कर रही है कि हमारी सेना की ताकत बढ़े। दूसरा पक्ष उन ताकतों का है, जो किसी भी कीमत पर देश को कमजोर करना चाहता है। आप मुझे बताइए भाईयो, हमारे देश की सेना ताकतवर होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? देश की सेना सामर्थ्‍यवान होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? सेना के हाथ में आधुनिक हथियार होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए?

आज देश ये देख रहा है कि कांग्रेस उन ताकतों के साथ खड़ी है, हमारी विरोधी उन ताकतों के साथ खड़े हैं जो हमारी सेनाओं को मजबूत नहीं होने देना चाहते। ऐसे लोगों की कोशिशों को किन-किन देशों से समर्थन मिल रहा है। ये भी देश देख रहा है। क्‍या कारण है कि यहां ऐसी भाषा कुछ नेता बोल रहे हैं तालियां पाकिस्‍तान में बजाई जा रही हैं? ऐसा क्‍यों हो रहा है?

साथियों, राम‍चरित्र मानस में एक चौपाई है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा है कि भगवान राम किसी का व्यक्तित्व समझाते हुए कहते हैं-  “झूठई लेना, झूठई देना, झूठई भोजन, झूठ चबेना” । यानि कुछ लोग झूठ ही स्वीकार करते हैं, झूठ ही दूसरो को देते हैं, झूठ का ही भोजन करते हैं और झूठ ही चबाते रहते हैं।

कुछ लोगों ने इन्‍हीं पंक्तियों को अपने जीवन का मूलमंत्र बना दिया है। और इसलिए ऐसे लोगों के लिए देश का रक्षा मंत्रालय भी झूठा है, देश की रक्षा मंत्री भी झूठी है, भारतीय वायुसेना के अफसर भी झूठे हैं, फ्रांस की सरकार भी झूठी है, अब तो उन्‍हें देश की सर्वोच्‍च अदालत भी झूठी लगने लगी है। लेकिन साथियों, सच को ऋंगार की जरूरत होती नहीं है। सच को ऋंगार की जरूरत नहीं होती और झूठ चाहे जितना भी बोला जाए उसमें जान नहीं होती है। लेकिन हमारे यहां बहुत बड़ी बात कही गई है- “जयेत् सत्येन चानृतम्” यानि झूठ बोलने की प्रवृत्ति पर सत्यवादिता से ही विजय प्राप्त होती है।

मैं देशवासियों से स्‍पष्‍ट कहना चाहता हूं कि कांग्रेस सरकारों का इतिहास सेनाओं के प्रति, कांग्रेस का रवैया क्‍या रहा? ये देश कभी उनको माफ नहीं करेगा, देश कभी उसे भूलेगा नहीं।

साथियों, कारगिल युद्ध के बाद हमारी वायुसेना ने आधुनिक विमानों की जरूरत बताई थी। कारगिल की लड़ाई के बाद, अटल जी की सरकार के बाद, कांग्रेस ने दस साल देश पर राज किया लेकिन वायुसेना को मजबूत नहीं होने दिया। आखिर क्‍यों, किसके दबाव में?  

भाइयों और बहनों, रक्षा सौदों के मामलों में कांग्रेस का इतिहास बोफार्स घोटाले वाले क्वात्राकी मामा का रहा है। कांग्रेस सरकार के समय में हुए हेलीकॉप्‍टर घोटाले के आरोपी एक और अंकल क्रिश्चियन मिशेल को पकड़ कर कुछ दिन पहले ही भारत लाया गया है। और हम सभी ने ये भी देखा है कि कैसे इस आरोपी को बचाने के लिए कांग्रेस ने तुरंत अपना वकील अदालत में भेज दिया। मैं कांग्रेस से जानना चाहता हूं कि क्‍या वो इसलिए भड़की हुई है, झूठ पर झूठ बोल रही है, क्‍योंकि भाजपा सरकार जो रक्षा सौदे कर रही है, उसमें कोई क्वात्रोकी मामा नहीं है, क्रिश्चियन मिशेल अंकल नहीं है? क्‍या इसलिए वो अब न्‍यायपालिका पर अविश्‍वास का माहौल पैदा करने में जुट गई है? न्‍यायपालिका को ही कटघरे में खड़ा करने में वो बराबर लगे हुए हैं।

भाइयों और बहनों, हमारे लिए हमेशा दल से बड़ा देश है। और जीवन पर्यंत आने वाली पीढि़यों तक हमारा यही मंत्र रहेगा। दल से बड़ा देश है। आज मैं देश को कहना चाहता हूं कि जब देश की सुरक्षा की बात हो, सेना की जरूरतों की बात हो, सैनिकों के सम्‍मान की बात हो, केंद्र की भाजपा एनडीए सरकार सिर्फ एक ही बात का ध्‍यान रखती है- राष्‍ट्रहित, देशहित, जनहित। यही हमारी परवरिश है, यही हमारी सरकार के संस्‍कार हैं।

हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि भारत की सेनाएं किसी से कम न हों, हमारे लिए जान की बाजी लगाने वाले सैनिकों को कभी दिक्‍कत न हो। आखिर मैं उस मां के प्रति भी तो जवाबदेही हूं जो अपना बेटा सीमा पर भेजती है। मैं उस बहन के प्रति भी तो जवाबदेही हूं जिसने अपना भाई बार्डर पर भेजा है। जो परिवार, जो बच्‍चे अपने पापा का इंतजार कर रहे हैं उनके प्रति भी तो मेरी जवाबदेही है। जब तक हमारी सरकार है, जब तक मैं हूं, सरकार ऐसे लाखो, करोड़ों परिवारों के प्रति जवाबदेह होगी, एक परिवार के प्रति नहीं। इसके लिए कड़े से कड़े फैसले लेना हो, हमारे कदम कभी पीछे नहीं हटेगें।  

भाइयों और बहनों, हमारे जवानों के सुरक्षा के प्रति कांग्रेस का रवैया क्‍या रहा, ये मैं देश को फिर याद दिलाना चाहता हूं। साल 2009 में भारत की सेना ने 1 लाख 86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट की मांग की थी। 2009 से लेकर के 2014 तक, पांच साल बीत गए, लेकिन सेना के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट नहीं खरीदी गई। केंद्र में हमारी सरकार बनने के बाद, 2016 में हमनें सेना के लिए 50 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट खरीद करके उनको स्वीकृत किया। मैं देश को ये भी जानकारी देना चाहता हूं कि इस साल अप्रैल में पूरी 1 लाख 86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट का आर्डर दिया जा चुका है। ये जैकेट भारत की ही एक कंपनी बना रही है।

भाइयों और बहनों, कांग्रेस के पापों के बारे में बताने के लिए इतना कुछ है कि बोलते-बोलते शायद सप्‍ताह के सप्‍ताह निकल जाए। आज मैं देश को ये भी जानकारी देना चाहता हूं, अगर 2014 के बाद भी देश में कांग्रेस की सरकार बनती तो हमारा गौरव, देश का गौरव, तेजस लड़ाकू विमान हमेशा-हमेशा के लिए डिब्‍बे में बंद कर दिया जाता। कोई पूछने वाला नहीं होता। कांग्रेस सरकार के समय तेजस के निर्माण से जुड़ी हर चीज को कमजोर करने का प्रयास यूपीए सरकार में हुआ। ये प्रोजेक्‍ट पहले ही बरसों से अटका हुआ था, लेकिन कांग्रेस सरकारों के दौरान इसे तेज करने की कोई कोशिश नहीं हुई।

भाजपा और एनडीए की सरकार आने के बाद हमने जुलाई 2016 में ये फैसला लिया कि तेजस को 45 स्कवाड्रन में शामिल किया जाएगा। हमारी सरकार ने 83 नए तेजस विमान खरीदे जाने का प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दी। इतना ही नहीं, तेजस विमान बनाने के HAL की क्षमता को दो गुना करने के लिए पिछले साल 1400 करोड़ रुपये की भी मंजूरी दी गई है। 

भाइयों और बहनों, स्‍वतंत्रता के बाद से ही कांग्रेस का ये तरीका रहा है, कांग्रेस सरकार के द्वारा किए गए हर रक्षा सौदे में कोई ना कोई विदेशी मामा, कोई विदेशी अंकल, कोई चाचा, कोई भतीजा, कोई ना कोई तो निकल आता है। और इसलिए जब पारदर्शिता और इमानदारी से सौदे होते हैं तो कांग्रेस बौखला जाती है। एक तय रणनीति के तहत सेना पर ही धावा बोल देती है, सेना को कमजोर करने का प्रयास करने लगती है।

साथियों, सेनाओं की मान-मर्यादा वैसे भी कांग्रेस और उनके चेले-चपाटो की कल्‍पना से परे है। जिस पार्टी के लोग हमारे सेना अध्‍यक्ष को गुंडा कहते हों और गुंडा कहने वाले को जहां पार्टी में ऊंचे पद पर बिठाया जाता हो, ऐसे लोगों से और क्‍या उम्‍मीद रखी जा सकती है। जिस पार्टी के लोग सर्जिकल स्‍ट्राइक पर सवाल उठाते हों, अपनी सेना से ज्‍यादा दुश्‍मनों के दावों पर ज्‍यादा भरोसा रखते हों, उससे क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है?

जिस पार्टी के लोग मामूली रकम सिर्फ पांच सौ करोड़ रुपया रखकर के फौज की आंख में धूल झोंकने का ही प्रयास करते हों। और पांच सौ करोड़ रुपये में वन रैंक वन पेंशन का झूठा दिलासा देकर के फूलमाला पहनने  लग जाते हों, ऐसे लोगों से क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है? वन रैंक वन पेंशन का विषय भी तो चालीस साल से लटका हुआ था, इसे भी हमारी सरकार ने पूरा किया। 11 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की राशि एरियर के तौर पर पूर्व सैनिकों, फौजियों को मिल भी चुकी है।

साथियों, कांग्रेस के राज में न जवान की परवाह की जाती है, न किसान की परवाह की जाती है। जवानों के बाद अब मैं विस्‍तार से किसानों की भी बात करूंगा।

70 साल में पहली बार देश की किसी सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के बारे में सोचा है, तो वो हमारी सरकार है, एनडीए की सरकार है। किसानों की एक-एक परेशानी समझकर, भविष्‍य की जरूरतों को समझकर, बीज से लेकर के बाजार तक हमारी सरकार ने नीतियां बनाई हैं, और उन्‍हें लागू करवाई है। हम बहुत ईमानदारी से, बहुत परिश्रम से किसानों को खेती से जुड़े संकटों से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देश के किसानों को कांग्रेस का इतिहास, उसकी नीतियां, उसकी सच्‍चाई, उसकी धोखाधड़ी कभी भी नहीं भूलनी चाहिए। कांग्रेस के पास इस बात का क्‍या जवाब है कि जब वो दस साल तक सत्‍ता में रही तो क्‍या उसने स्‍वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू क्‍यों नहीं किया? आखिर किसका दबाव था? क्‍यों उसने एमएसपी जैसे अहम विषय को जमीन के भीतर ही गाड़ दिया था। इस बात का जवाब कांग्रेस कभी नहीं देगी और न ही कभी उसका बनाया  इकोसिस्टम उससे कभी जवाब मांगेगा।

लेकिन भाइयों-बहनों, केंद्र की एनडीए सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एमएसपी पर स्‍वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू किया। खरीफ और रबी की बाइस फसलों पर आज एमएसपी को सुनिश्चित किया गया है। कांग्रेस का इकोसिस्टम आपको कभी ये नहीं बताएगा कि सिर्फ एक फैसले से और ये बहुत महत्‍वपूर्ण बात है, सिर्फ इस एक फैसले से हमारे देश के किसानों को 60 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा मिलना तय हुआ है। 60 हजार करोड़ रुपये का फायदा।

भाइयों-बहनों, मैं कांग्रेस से ये भी जानना चाहता हूं कि आखिर वो किसका दबाव था जब वो यूरिया की शत-प्रतिशत नीम कोटिंग के फैसले से भागती रही। हमारे देश का किसान यूरिया के अभाव में लाठियां खाता था। कांग्रेस की सरकार उसका तमाशा देखती रही।

साथियों, मैं देश को फिर याद दिलाना चाहता हूं कि यही कांग्रेस सरकार थी जब किसानों से फसल बीमा के लिए 15 प्रतिशत से ज्‍यादा प्रीमियम लिया जाता था। बीमा की राशि में भी कैपिंग होती थी। तीस प्रतिशत की फसल का नुकसान हुआ है या चालीस प्रतिशत का, किसी में भी बड़े-बड़ें घोटाले के खेल खेले जाते थे। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाकर हमारी सरकार ने किसानों की इन सारी समस्‍याओं को दूर किया। आज अलग-अलग फसलों पर सिर्फ डेढ़ प्रतिशत से लेकर पांच प्रतिशत तक का प्रीमियम किसानों से लिया जाता है। सौ रुपये में सिर्फ डेढ़ रुपया ज्‍यादा से ज्‍यादा पांच रुपया। अगर मैं पिछले दो वर्ष का आंकड़ा दूं तो किसानों से प्रीमियम के रूप में आठ हजार करोड़ रुपया लिए गया पूरे देश में। पूरे देश में आठ हजार करोड़ लेकिन आपदा के बाद, फसल खराब होने के बाद किसानों को 33 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा की मदद उससे मिली। आठ हजार के सामने 33 हजार करोड़ किसान के पास गया। यानी जितना किसानों से लिया उससे चार गुना से ज्‍यादा वापिस किया गया।

साथियों, बीते कुछ समय से कर्जमाफी को लेकर भी कांग्रेस बड़ी-बड़ी बाते कर रही है। लेकिन ये भी सिर्फ धोखा है, झूठ है, कर्नाटक में कांग्रेस ने किसानों से कर्जमाफी का वायदा किया था। सिर्फ दस दिन की बात कही गई थी लेकिन आज छह महीनें बाद सच्‍चाई कुछ और है। अभी दो-तीन दिन पहले ही अखबारों ने विस्‍तार से रिपोर्ट छापी है कि कर्नाटक में छह महीनें में एक हजार किसानों को भी कर्जमाफ नहीं हुआ है। सोचिए, एक हजार को भी नहीं। सैंकड़ों किसानों के खिलाफ अदालतों ने कार्रवाई शुरू कर दी है, उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट निकल रहा है। कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है ये सच्‍चाई दब जाए, छिप जाए, देश के किसानों के सामने न आए। लेकिन किसानों से की जा रही ये धोखाधड़ी उन्‍हें हमेशा-हमेशा के लिए बर्बाद कर देने वाली है। कांग्रेस की साजिश को बीजेपी सरकार घर-घर जाकर के पहुंचाएगी।  

साथियों, याद करिये 2008 में भी कांग्रेस ने देश भर के किसानों को ऐसी ही कर्जमाफी का वायदा किया था, तब देश के किसानों पर छह लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा का कर्ज था। लेकिन कांग्रेस सरकार ने कर्जमाफी की, छह लाख करोड़ कर्ज और किया कितना सिर्फ 60 हजार करोड़। कहां छह लाख करोड़ और कहां 60 हजार करोड़, इतना बड़ा धोखा। इतना ही नहीं, कर्जमाफी की आड़ में ऐसे 35 लाख लोग करीब-करीब वो निकल आए जो कर्ज माफ कर दिया गया लेकिन वे कर्जमाफी के हकदार ही नहीं थे, पिछले दरवाजे से रुपये मांग रहे थे।

भाइयों और बहनों, खेती, किसानी से जुड़ा कोई भी सेक्‍टर हो, कांग्रेस ने उसे मजबूत करने की ओर कभी भी ध्‍यान नहीं दिया। फूड प्रोसेंसिंग हो, बीज की क्‍वालिटी में सुधार हो, Agriculture research हो, खेती से आय बढ़ाने वाले अन्‍य साधन हों, सिंचाई की व्‍यवस्‍था हो, जितना प्रोत्‍साहन इन्‍हें सरकार से मिलना चाहिए था वो कांग्रेस ने कभी नहीं दिया।

आज सैंकड़ों नए विज्ञान केंद्र खोलकर 17 करोड़ से ज्यादा सॉयल हेल्थ कार्ड देकर, फूड प्रोसेसिंग में 100 प्रतिशत FDI करके, देशभर में सैंकड़ों नए store houses खोलकर, पूरी सप्‍लाई चेन को मजबूत करके किसानों का खर्च कम करने और फसल की ऊंची कीमत दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों, सरकार चाहे केंद्र की हो, या फिर योगी जी की अगुवाई वाली यूपी की सरकार हमारा एक ही मंत्र है सबका साथ सबका विकास, इसको सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात हम लगे हुए हैं। यहां रायबरेली में भी आठ लाख लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं, पौने 2 लाख महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्‍शन दिया गया है, लगभग 55 हजार घरों को मुफ्त बिजली कनेक्‍शन देकर रोशन किया गया है।

आप सभी का अभूतपूर्व सहयोग सरकार के प्रयासों को शक्ति दे रहा है। आपके सहयोग की ये शक्ति है कि सामान्‍य से सामान्‍य मानवी जीवन में सकारात्‍मक परिवर्तन लाने में हम सफल हो पा रहे हैं। आने वाले समय में सरोकार और सहयोग की इस भावना को हमें और मजबूत करना है, मिलकर के करना है। रायबरेली समेत पूरे उत्‍तर प्रदेश के तेज विकास के लिए हर स्‍तर पर हमें मिलकर आगे बढ़ना है। इसी विश्‍वास के साथ एक बार फिर तमाम विकास परियोजनाओं के लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप यहां भारी संख्‍या में हमें आशीर्वाद देने पहुंचे इसके लिए भी मैं आप सबका ह़दय से धन्‍यवाद करता हूं।

मेरे साथ जोर से बोलिए भारत माता की जय...., भारत माता की जय...., भारत माता की जय....                                            

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

******

Source: PIB

Text of PM’s address at inauguration of various development projects at Prayagraj, UP

Sunday, December 16, 2018 0
Prime Minister's Office

Text of PM’s address at inauguration of various development projects at Prayagraj, UP 

Posted On: 16 DEC 2018 8:01PM by PIB Delhi

मंच पर विराजमान उत्‍तर प्रदेश के राज्‍यपाल श्रीमान राम नाइक जी, उत्‍तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ जी, उप-मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, उत्‍तर प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्‍यगण, संसद में मेरे सहयोगी श्रीमान श्यामाचरण गुप्‍ताजी, विनोद कुमार सोनकर जी, वीरेन्‍द्र सिंह मस्‍त जी, प्रयागराज की मेयर अभिलाषा गुप्‍ता जी और भारी संख्‍या में पधारे प्रयागराज के मेरे भाइयो और बहनों।

तप, तपस्‍या, संस्‍कृति, संस्‍कार की धरती तीर्थराज प्रयाग के जन-जन को मेरा सादर प्रणाम। जब भी प्रयागराज आने का अवसर मिलता है, तो मन एवं मस्तिष्‍क में एक अलग ही ऊर्जा का संचार होता है। यहां के वातावरण में, यहां के कण-कण में ही ऋषियों और मनीषियों की दिव्‍यता का वास है। जिसका संचार यहां आने वाले हर यात्री को अनंतकाल से होता रहा है।

प्रयाग के बारे में कहा गया है- को कहि सकहि प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।। 

मतलब ये कि पापों के समूहरूपी हाथी को मारने के लिए सिंह रूप प्रयागराज के प्रभाव और महात्‍मय का वर्णन करना मुश्किल है। ये वो पवित्र तीर्थस्‍थल है जिसके दर्शन कर सुख के समुद्र रघुकुल श्रेष्‍ठ श्रीराम जी ने भी सुख पाया।

भाइयो और बहनों, आज जब अर्द्धकुंभ से पहले मैं यहां आया हूं, तब मैं आप सभी को, देश के हर जन को, एक खुशखबरी भी देना चाहता हूं। इस बार अर्द्धकुंभ में सभी श्रद्धालु अक्षय वट के दर्शन कर सकेंगे। कई पीढ़ियों से अक्षय वट किले में बंद था, लेकिन इस बार यहां आने वाला हर श्रद्धालु प्रयागराज की त्रिवेणी में स्‍नान करने के बाद अक्षय वट के दर्शन का भी सौभाग्‍य प्राप्‍त कर सकेगा।

इतना ही नहीं, अक्षय वट के साथ सरस्‍वती कुंभ दर्शन भी अब उसके लिए संभव हो पाएंगे। मैं तो खुद भी थोड़ी देर पहले अक्षय वट के दर्शन करके आपके बीच आया हूं। ये वृक्ष अपनी गहरी जड़ों के कारण बार-बार पल्लिवित होकर हमें भी जीवन के प्रति ऐसा ही जीवट रवैया अपनाने की प्रेरणा देता है।

साथियो, ऐसे दिव्‍य औरजीवंत प्रयागराज को और आकर्षक और आधुनिक बनाने से जुड़ी करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्‍यास थोड़ी देर पहले यहां किया गया है। इसमें सड़क, रेलवे, शहर और मां गंगा की साफ-सफाई, स्‍मार्ट सिटी जैसे सैंकड़ों प्रोजेक्‍ट इसमें शामिल हैं।

प्रयागराज के जन-जन आप सभी के जीवन को सुगम और सरल बनाने के लिए बनी इन सुविधाओं के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इन परियोजनाओं से कुंभ में यहां प्रवास करने वाले कल्‍पवासियों को भी बहुत सुविधा मिलेगी।

साथियो, भाजपा सरकार ने कुंभ के दौरान connectivity से लेकर यहां के infrastructure पर विशेष ध्‍यान दिया है। हमारा प्रयास प्रयागराज तक आने वाले हर रास्‍ते को मजबूत करने का, सुधारने का; चाहे वो रेल मार्ग हो, air connectivity हो या फिर सड़कों को सुधारने की बात हो। कुंभ को ध्‍यान में रखकर रेलवे मंत्रालय इस बार भी अनेक नई ट्रेन चलाने जा रहा है। अभी शहर के बड़े फ्लाईओवर, रेलवे ओवर ब्रिज और अंडरपास, बिजली व पेयजल की जिन-जिन परियोजनाओं का लोकार्पण मैंने किया है, उससे यहां का infrastructure और connectivity, दोनों ही सुधरेंगे।

इस कार्यक्रम के बाद मैं यहां से आपके प्रयागराज एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का उद्घाटन करने के लिए भी जा रहा हूं। इस नए टर्मिनल को रिकॉर्ड एक साल केभीतर बनाया गया है। इस टर्मिनल से यात्रियों की सुविधा तो बढ़ेगी ही, देश के कई शहरों से प्रयागराज की connectivity भी बढ़ जाएगी। मैं प्रयागराज के लोगों को इसकी अग्रिम बधाई देता हूं।

साथियो, ये तमाम सुविधाएं यूं तो अर्द्धकुंभ से ठीक पहले तैयार हो रही हैं, लेकिन इनका प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं रहने वाला। ये आने वाले समय में प्रयागराज में जीवन के हर स्‍तर पर सकारात्‍मक असर लाने वाली हैं। इसमें सबसे खास बात ये भी है कि पहले की तरह कच्‍चा-पक्‍का काम नहीं किया गया है, जिन सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है, वो स्‍थाई हैं, permanent हैं। 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनेइन्टीग्रेटेड कमांड कन्ट्रोल सेन्टरप्रयागराज की पौराणिकता के आधुनिकता से संगम का प्रतीक है।ये स्‍मार्ट प्रयागराज का एक अहम सेंटर है। सड़क, बिजली, पानी से लेकर तमाम व्‍यवस्‍थाएं इसी सेंटर से संचालित होने वाली हैं।

भाइयो और बहनों, सरकार का प्रयास है कि इस बार अर्द्धकुंभ में तप से तकनीक तक, उसके हर पहलु का अनुभव, दुनियाभर के लोगों को मिल सके। तप की भी अनुभूति हो और आधुनिक तकनीक की भी अनुभूति हो। अध्‍यात्‍म, आस्‍था और आधुनिकता की त्रिवेणी कितनी भव्‍य और बेजोड़ हो सकती है, इसका अनुभव लेकर लोग यहां से जाएं, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है।

यहां बना सेल्‍फी प्‍वाइंट भी आकर्षण का केंद्र है। थोड़ी देर पहले मैंने विशेष अतिथियों के साथ दिव्‍य कुंभ, भव्‍य कुंभ सेल्‍फी प्‍वाइंट पर भी फोटो खिंचवाई है।

साथियो अर्द्धकुंभ और सेल्‍फी का संगम तब तक अधूरा रहेगा जब तक यहां की मूल शक्ति, मूल संगम, त्रिवेणी भव्‍य न हो।त्रिवेणी की शक्ति का एक बड़ा स्रोत है मां गंगा। मां गंगा स्‍वच्‍छ हो, निर्मल हो, अविरल हो; इसके लिए सरकार तेज गति से काम कर रही है।

आज यहां जो हजारों करोड़ के प्रोजेक्‍ट्स का लोकार्पण हुआ है, उसमें गंगा जी की सफाई और यहां के घाटों के सौन्‍दर्यीकरण से जुड़े अनेक प्रोजेक्‍ट्स भी उसमें शामिल हैं। 1700 करोड़ रुपये की लागत से बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्‍लांट से शहर के करीब एक दर्जन नालों को सीधे गंगाजी में बहने से रोका जा सकेगा। वहीं नमामि गंगे परियोजना में करीब 150 घाटों का सौन्‍दर्यीकरण भी किया जा रहा है। इसमें से करीब 50 घाटों का काम पूरा हो गया है। ऐसे 6 घाटों का लोकार्पण भी आज यहां किया गया है।

भाइयो और बहनों, प्रयागराज हो, काशी हो, कानपुर हो, यूपी के तमाम शहरों समेत गंगा के किनारे बसे हर राज्‍य में इस प्रकार की सुविधाओं का निर्माण हो रहा है।नमामि गंगे मिशन के तहत अब तक साढ़े 24 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा कीपरियोजनाओं को स्‍वीकृति दे दी जा चुकी है। 5 हजार करोड़ रुपये के 75 प्रोजेक्‍ट्स पूरे किए जा चुके हैं। हजारों करोड़ रुपये के 150 प्रोजेक्‍ट्स, उस पर तेजी से काम चल रहा है।

साथियो, गंगा मैया निर्मल और अविरल होगी, इस निश्‍चय के पीछे की सबसे बड़ी शक्ति, सरकारी तंत्र तो है ही; करोड़ों स्‍वच्‍छाग्रहियों, मां गंगा के सेवकों का भी योगदान है। जन-जन इस अभियान से जुड़े रहे हैं। अपने स्‍तर पर काम कर रहे हैं। गंगाजी के प्रति जन-भागीदारी और जिम्‍मेदारी ने हमारे प्रयासों को अधिक बल दिया है। अब गंगा के किनारे के करीब-करीब सारे गांव अब खुले में शौच से मुक्‍त घोषित कर चुके हैं।

भाइयो और बहनों, शास्‍त्रों में स्‍वच्‍छता को देवत्व से जोड़ा गया है। कुंभ में देवताओं का निवास होता है। ऐसे में कुंभ में मां गंगा की सफाई हो या फिर स्‍वच्‍छ कुंभ की बात, इस बार के कुंभ में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

अभी मैंने यहां आने से पहले स्‍वच्‍छ कुंभ की प्रदर्शनी देखी। और लोकार्पण में भी कुंभ में स्‍वच्‍छता रहे, इसके लिए आधुनिक तकनीक और पोर्टेबल काम्पैक्टरजैसे उपकरण लगाने की योजना की शुरूआत कर दी है।

साथियों, केंद्र सरकार उत्‍तर प्रदेश सरकार के साथ मिल करके ये सुनिश्चित करने में जुटी है कि आयोजन दर्शनीय, दार्शनिक और दिव्‍य बने। सरकार का पूरा प्रयास है कि यहां भारत के गौरवशाली अतीत के दर्शन और वैभवशाली भविष्‍य की झलक दुनिया को देखने के लिए मिले।   

मुझे प्रसन्‍नता है कि सरकार के इन प्रयासों में प्रयागराज का एक-एक नागरिक जुड़ा है। अपने स्‍तर पर अनेक प्रयास आप सभी कर रहे हैं। शहर की साफ-सफाई से लेकर अतिथि के सत्‍कार के लिए सकारात्‍मक वातावरण बनाने में आप लगे हुए हैं। यहां जो प्रदर्शनी लगी है उसमें मैंने देखा कि कैसे आकर्षक पेंटिंग्‍स, उससे शहर को सजाया जा रहा है। चित्रों के माध्‍यम से प्रयागराज और भारत के दर्शन कराने का ये अद्भुत प्रयास सराहनीय है और यह अनुभव यहां आने वाले हर यात्री के लिए अनुपम होगा।

साथियो, प्रयागराज के लोगों की इसी भावना को समझते हुए, आपके स्‍नेह को देखते हुए, मैं दुनियाभर में लोगों को अर्द्धकुंभ में आने के लिए न्‍योता दे आया हूं। बीते एक-डेढ़ वर्ष से जहां भी मैं गया हूं, वहां रहने वाले हर भारतवासी को अपने विदेशी दोस्‍तों के साथ प्रयागराज आकर भारत की सांस्‍कृतिक विरासत से जुड़ने का निमंत्रण मैंने स्‍वयं जा-जा करके दिया है; क्‍योंकि मैं भी अब उत्‍तर प्रदेश वाला हूं ना।

आपने देखा होगा, कल ही यहां संगम पर 70 देशों का झंडा लहराया गया । 70 देशों के भारत में नियुक्‍त प्रतिनिधियों ने, राजनयिकों ने पूरे कुंभ क्षेत्र का दौरा किया, यहां के अद्भुत वातावरण का आनंद लिया। इस तरह के प्रयास कुंभ की वैश्विक लोकप्रियता बढ़ाने में और सहायक सिद्ध होंगे।

साथियो, इस बार दो महत्‍वपूर्ण आयोजन दुनिया के सबसे पुरातन सांस्‍कृतिक शहरों- प्रयागराज और काशी में एक साथ हो रहे हैं। जब यहां अर्द्धकुंभ के लिए दुनिया जुटेगी तब काशी में प्रवासी भारतीय दिवस के लिए दुनियाभर के भारतीय जुटने वाले हैं। जाहिर है उनका भी यहां आने का कार्यक्रम बनेगा।

भाइयो और बहनों, अर्द्धकुंभ सिर्फ करोड़ों लोगों के एकजुट होने का ही पर्व नहीं है, यहां आने वाले करोड़ों लोगों के जरिए पूरा देश, उसमें आने वाले करोड़ों लोगों के बीच होने वाला संपर्क और संवाद हमारे देश को दिशा देता है। कुंभ में आने वाले करोड़ों लोगों के साथ ही करोडों विचारों का प्रवाह भी भारत को समृद्ध और सशक्‍त बनाता है।

कुंभ का पर्व भारत और भारतीयता का सबसे बड़ा प्रमाण है। ये पर्व भाषा, भूषा और भिन्‍नता को खत्‍म कर एक होने की प्रेरणा देता है। ये पर्व हमें जोड़ता है, ये पर्व गांव और शहर को एक करता है। एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत की सही तस्‍वीर यहां दिखती है। ऐसे में हमारी जिम्‍मेदारी है कि यहां आने वाले हर अतिथि का हम खुद ध्‍यान रखें।ये आयोजन सिर्फ श्रद्धा नहीं, देश की प्रतिष्‍ठा का भी सवाल है। हमें ये सुनिश्चित करना है कि भारत की एक नई तस्‍वीर, उसे ले करके दुनिया यहां से वापस जाए।

इस दौरान दुनियाभर के हजारों छात्र यहां के मैनेजमेंट के बारे में सीखने-पढ़ने भी आएंगे। दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी इस आयोजन की विशालता, विविधता और सफलता पर बच्‍चों को मैनेजमेंट के गुर सिखाती रही है।

साथियो, भारत की पहचान हमारी सांस्‍कृतिक विरासत से है, ज्ञान के भंडार से है। इसी शक्ति से दुनिया को परिचित करवाने के लिए स्‍वामी विवेकानंद समेत तमाम महर्षियो ने अपना जीवन समर्पित कर दिया।बीते चार-साढ़े चार वर्षों सेकेंद्र सरकार भी ये निरंतर प्रयास कर रही है कि संसाधनों के साथ-साथ देश की सांस्‍कृतिक और आध्‍यात्मिक‍ विरासत का भी प्रभाव बढ़े।

साथियो, मैं आज पवित्र प्रयागराज में आपसे और देश के लोगों से एक और अहम विषय पर बात करना चाहता हूं। प्रयागराज वो जगह है,‍ जिसे उत्‍तर प्रदेश में न्‍याय का मंदिर भी कहा जा सकता है। बीते कुछ समय से जिस तरह एक बार फिर न्‍यायपालिका पर दबाव का खेल शुरू हुआ है, उस स्थि‍ति में देश को, आज की युवा पीढ़ी को सतर्क किया जाना बहुत आवश्‍यक है।

साथियो, देश पर सबसे ज्‍यादा समय शासन करने वाली पार्टी ने हमेशा ही खुद को हर कानून, न्‍यायपालिका, संस्‍था, और यहां तक कि देश से भी अपने-आपको ऊपर माना है। देश की हर उस संस्‍था को, यहां तक कि‍ संवैधानिक संस्‍थाओं को भी इस पार्टी ने बर्बाद कर दिया, जो उसकी मर्जी से नहीं चलीं, उसके इशारों पर काम करने को, झुकने को तैयार नहीं हुईं।

भाइयो और बहनों, इसी मनमानी की वजह से हमारे देश की न्‍याय प्रणाली को भी कमजोर करने का प्रयास किया गया। इसका सिर्फ एक कारण था कि न्‍यायपालिका उन संस्‍थाओं में से एक रही है, जो इस पार्टी के भ्रष्‍ट और निरंकुश तरीकों के‍ खिलाफ खड़ी रहती हैं। इस बात को प्रयागराज और यूपी के लोगों से बेहतर कौन जान सकता है कि कांग्रेस को न्‍यायपालिका क्‍यों पसंद नहीं है? यूपी के लोग वो दिन याद करें- जब इस पार्टी के सर्वोच्‍च नेता द्वारा यहां जनमत को अपमानित करने का काम किया गया था। क्‍या ये लोकतंत्र का अपमान नहीं था?

साथियो, देश वो दिन भी नहीं भूल सकता जब प्रयागराज के हाईकोर्ट ने सत्‍य और संविधान का साथ देकर उनको संसद से, पार्लियामेंट मेंबर से बेदखल कर दिया तो उन्‍होंने लोकतंत्र को ही समाप्‍त करने की कोशिश की। देश पर आपातकाल मढ़ दिया। यहां तक कि देश का संविधान भी बदल डाल दिया गया। कोशिश तो यहां तक हुई कि न्‍यायपालिका से चुनाव याचिका सुनने तक का अधिकार छीन लिया जाए।

साथियो, कांग्रेस के नेताओं की यही प्रवृत्ति रही है। इस प्रवृत्ति में देश की संवैधानिक संस्‍‍थाओं को एक पार्टी के आगे हाथ बांधे खड़ा रहने पर मजबूर किया जाता है। जो झुकता नहीं उसे तोड़ने की कोशिश की जा रही है। ये उनकी सामंती और राजाशाही सोच है जो उन्‍हें निष्‍पक्ष संस्‍थाओं को बलपूर्वक बर्बाद करने को उकसाती रहती है। न्‍यायपालिका की प्रतिष्‍ठा को बर्बाद करने, उसे नष्‍ट करने के लिए ये पार्टी सिर्फ बल का ही इस्‍तेमाल नहीं करती है, वो छल का भी इस्‍तेमाल करती है। अपनी साजिश को सफल करने के लिए कपट, प्रपंच, धूर्तता की हर हद पार कर जाती है। न्‍यायपालिका को लेकर इस पार्टी की कार्य संतुति रही है- जब शासन में होते हैं तो लटकाना और विपक्ष में होते हैं तो धमकाना।

साथियो, मैं देश को केशवानंद भारती के महत्‍वपूर्ण केस की भी याद दिलाना चाहता हूं। इस केस में फैसला सुनाने वाले जजों ने जब दबाव में आने से इनकार कर दिया तोवर्षों से चली आ रही न्‍यायिक परम्‍परा को ही बदल डाला गया। सबसे सीनियर जज को चीफ जस्टिस बनाने की बजाय एक ऐसे न्‍यायमूर्ति को ये पद दे दिया, जो वरिष्‍ठता के क्रम में तीन जजों के बाद आते थे। ये था इन लोगों के काम करने का तरीका, न्‍यायपालिका पर दबाव बनाने का तरीका।इसी तरह आपातकाल के फैसले पर जब जस्टिस खन्‍ना ने असहमति जताई, तो उनके साथ भी यही किया गया। उनके भी वरिष्‍ठता क्रम को नजरअंदाज किया गया।

भाइयो और बहनों, अपने स्‍वार्थ के आगे न ये देश का हित देखते हैं, न लोकतंत्र का। इनके मन में न कानून के लिए सम्‍मान है, न परम्‍परा के लिए। इनके एक नेता का सार्वजनिक तौर पर दिया गया बयान तो खूब चर्चा में रहा था। उन्‍होंने कहा था- हम मुख्‍य न्‍यायाधीश उसी को बनने देंगे जो हमारी विचारधारा, हमारे विचारों से सहमत हो और हमारे हिसाब से चले।

साथियों, हमारे देश में न्‍यायपालिका देश के संविधान को सर्वोपरि रख करके काम करती रही है। लेकिन देश इस बात का भी गवाह रहा है कि नयायपालिका को अपने हिसाब से मोड़ने के लिए कैसे एक राजनीतिक दल द्वारा लोभ, लालच, बैर, सत्‍ता, सबका इस्‍तेमाल किया जाता रहा है। इस दल के पास न्‍यायपालिका को अटकाने, लटकाने, भटकाने और धमकाने के बहुत से तरीके उनकी आदत है।

हाल में ही हमने देखा कि कैसे उन्‍होंने न्‍यायपालिका के सर्वोच्‍च न्‍यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग प्रस्‍ताव लाने की कोशिश की। जजों को डराने, धमकाने की ये कोशिश उनकी पुरानी सोच का हिस्‍सा है।

मुझे सर्खियों में रहा वो वाक्‍य भी याद है जब इनके एक नेता के एक केस की सुनवाई कर रहे जज से पूछा गया था कि क्‍या वो नहीं चाहते कि उनकी पत्‍नी करवाचौथ मनाए? ये धमकी नहीं तो क्‍या है?

भाइयो और बहनों, ये लोग हर संस्‍था को बर्बाद करने का प्रयास करने के बाद अब लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। लेकिन इनका व्‍यवहार, इनकी साजिशें, बार-बार ये साबित कर रही हैं कि ये खुद को देश, लोकतंत्र, न्‍यायपालिका और यहां तक की लोगों  के भी ऊपर समझते हैं।अभी दो दिन पहले भी हम इसका एक और उदाहरण देख चुके हैं। और इसलिए मैं आपसे फिर कहना चाहता हूं, सावधान रहिए, सतर्क रहिए ऐसे लोगों से, ऐसे दल से।

भाइयो और बहनों, कांग्रेस का इतिहास जितना स्‍याह है, वर्तमान उतना ही कलंकित। सत्‍ता और स्‍वार्थ में डूबे इन लोगों और इनके सहयोगियों को न तो देशवासियों से मतलब है, न देश से और न ही देश की आर्थिक-सांस्‍कृतिक समृद्धि से। उन्‍हें खास मौकों पर ही संस्‍कृति याद आती है, जबकि हमारे लिए तो राष्‍ट्र, राष्‍ट्र की सम्‍पन्‍नता, राष्‍ट्र का वैभव और आध्‍यात्मिक समृद्धि हमारी सोच का हिस्‍सा है।

इसी संस्‍कार के तहत यूपी समेत पूरे देश में प्रसाद योजना के तहत आस्‍था और आध्‍यात्‍म से जुड़े अहम स्‍थानों को जोड़ा जा रहा है। वहां सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। प्रयागराज हो, काशी हो, अयोध्‍या-वृंदावन हो, केदारनाथ से लेकर कामख्‍या और सबरीमाला तक, आस्‍था के ऐसे अनेक केंद्रों को भव्‍य और दिव्‍य बनाया जा रहा है।

भाइयो और बहनों, भारत किस प्रकार बदल रहा है। नया भारत कैसे पौराणिकता और आधुनिकता को समेट रहा है, उसकी झलक अर्द्धकुंभ में मिलने वाली है।

मेरा आप सभी प्रयागवासियों से आग्रह है कि हम आधुनिकता से आध्‍यात्‍म को, विकास से विश्‍वास को और सहूलियत से श्रद्धा को जोड़़कर कुंभ को सफलतम आयोजन बनाएं।

सरकार अपने दायित्‍व को पूरा कर रही है। लेकिन इतना बड़ा आयोजन सिर्फ सरकारी व्‍यवस्‍थाओं के भरोसे पर सफल होना संभव नहीं है। मैं खुद, योगीजी, हमारे तमाम साथी, आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस बार अर्द्धकुंभ को अभूतपूर्व आयोजन बनाएंगे।

इसी आशा के साथ एक बार फिर आप सभी को, प्रयागराज को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

जय गंगा मैया -  जय

जय यमुना मैया – जय

जय सरस्‍वती तैया – जय

जय तीर्थराज – जय तीर्थराज

जय तीर्थराज – जय तीर्थराज

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

भारत माता की – जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद

******

Source : PIB

PM launches development projects in Rae Bareli

Sunday, December 16, 2018 0
Prime Minister's Office

PM launches development projects in Rae Bareli

Posted On: 16 DEC 2018 3:52PM by PIB Delhi

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, who is on a day-long visit to Uttar Pradesh, visited the Modern Coach Factory in Rae Bareli today. At a public meeting, he flagged off the 900th coach, and a Humsafar Rake. He also dedicated to the nation, inaugurated, or laid the Foundation Stone for various development projects at Rae Bareli. 

Speaking on the occasion, the Prime Minister said that the projects that were dedicated, inaugurated, or for which Foundation Stones were laid today, are cumulatively worth Rs. 1000 crore. 

The Prime Minister said that the Modern Coach Factory is providing jobs to youth, and will make Rae Bareli a global hub of rail coach manufacturing. 

The Prime Minister recalled that it was on this day in 1971, that the Indian Army had defeated those that are a symbol of terror, cruelty and lawlessness. The Prime Minister said that today on one hand, the Government is trying to make the Armed Forces stronger; and on the other hand, there are those who do not want our Armed Forces to be strong. He said those that deal only in lies, are casting aspersions on the Defence Ministry, on the Air Force, and even on a foreign government. He said that the propensity to lie, can only be overcome by the truth. He said that when it comes to the country's security, and the requirements of the Armed Forces, the Union Government keeps only the interest of the nation in mind. 

The Prime Minister said that in order to increase farmers' incomes, the Union Government has already increased MSP for 22 crops. This decision alone will provide an extra amount of Rs. 60 thousand crore for the farmers. He said the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana has also benefited farmers whose crops have been destroyed by unforeseen causes. 

The Prime Minister said that the Union Government is committed to the Mantra of "Sabka Saath, Sabka Vikas."

*****
Source: PIB

2018-12-15

Promotion of AYUSH Schemes : Unstarred Question in Loksabha

Saturday, December 15, 2018 0
Promotion of AYUSH Schemes

(a) whether the Government efforts have resulted in increased inflow of patient to AYUSH sectors; 
(b) if so, the data available on the market size of AYUSH sector; 
(c) whether the Ministry is collaborating with other Ministries to popularize AYUSH schemes; 
(d) if so, the details of such collaborations; and 
(e) the steps taken by the Government to enhance private investments and entrepreneurship in this area?

GOVERNMENT OF INDIA

MINISTRY OF AYURVEDA,YOGA & NATUROPATHY,UNANI,SIDDHA AND HOMEOPATHY (AYUSH)

LOK SABHA

UNSTARRED QUESTION NO: 823                                                   ANSWERED ON: 14.12.2018

Promotion of AYUSH Schemes

POONAMBEN HEMATBHAI MAADAM

Will the Minister of AYURVEDA, YOGA & NATUROPATHY, UNANI, SIDDHA AND HOMOEOPATHY (AYUSH) be pleased to state: 

(a) whether the Government efforts have resulted in increased inflow of patient to AYUSH sectors; 
(b) if so, the data available on the market size of AYUSH sector; 
(c) whether the Ministry is collaborating with other Ministries to popularize AYUSH schemes; 
(d) if so, the details of such collaborations; and 
(e) the steps taken by the Government to enhance private investments and entrepreneurship in this area?

ANSWER

THE MINISTER OF STATE (IC) OF THE MINISTRY OF AYURVEDA,
YOGA & NATUROPATHY, UNANI, SIDDHA AND HOMOEOPATHY
(SHRI SHRIPAD YESSO NAIK)
(a): Yes, the Government efforts have resulted in increased inflow of patient to AYUSH sectors.
(b): No. of Patients visited AYUSH Government Health Care Facilities: -
YEAR Hospitals (incl. CHCs) Hospitals incl. CHCs), Dispensaries and PHCs
IPD OPD
2014-15 11,20,365 15,46,52,599
2015-16 11,56,695 15,94,59,379
2016-17 16,85,773 17,27,00,313

(c ): Yes.
(d): Ministry of AYUSH organizes International day of Yoga (IDY) in different countries in cooperation with Ministry of External Affairs.

Ministry of AYUSH participates in International forums in cooperation with Ministry of Commerce and Industry, Ministry of Health and Family Welfare and Department of Pharmaceuticals.

Central Council for Research in Homoeopathy (CCRH) , under Ministry of AYUSH has collaborated with Ministry of Health and Family welfare for the integration of AYUSH (Homeopathy along with Yoga) in the National Programme for Prevention and Control of Cancer, Diabetes, Cardiovascular Diseases & Stroke (NPCDCS) since 2015 at Krishna District (Andhra Pradesh), Darjeeling (West Bengal), Nashik (Maharashtra) and Sambalpur (Odisha) covering 19 Community Health Centres/District Hospitals/area Hospital/Block primary Health Care Centre.

? The Objectives of Program are as follows:
Health promotion of masses through behavior change
Disease prevention through early diagnosis of NCDs 
Reduction in NCD burden and their risk factors
Early management of NCDs through homoeopathic treatment alone or as add on to standard care
? The achievement of the program so far till November, 2018 are: 
No. of beneficiaries from OPD - 379136
No. of people at risk of developing NCDs -64302
No. of yoga session conducted- 18343
Number of persons attended yoga classes for life style management -255144
The National Institute of Siddha (NIS) has entered in to MoU with reputed educational Institutions like the Tamil Nadu Dr. M.G.R. Medical University, Sastra University, Ramachandra Medical University, Cancer Institute, Adyar etc. It is also collaborating with other institutions like Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) for harnessing information technology for the growth of Siddha system. 
(e): The details of activities undertaken by Ministry of AYUSH are as under:

(i) Ministry of AYUSH signed MoU with the Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSMEs) to collaborate for the purpose of promoting and developing Entrepreneurship in AYUSH Sector;
(ii) Organized a ‘National Seminar on Entrepreneurship and Business Development in Ayurveda’ on the occasion of 3rd Ayurveda Day on 4th November, 2018 ; and
(iii) Convened a meeting on ‘Invest in AYUSH’.

Source: Loksabha

PDF/WORD (Hindi)                                                                                      PDF/WORD (English)

MSME Support and Outreach Programme Launched by PM Success story of PMEGP

Saturday, December 15, 2018 0
Ministry of Micro,Small & Medium Enterprises

MSME Support and Outreach Programme Launched by PM Success story of PMEGP

Khadi – The Back Bone Of Rural India’s Economy

Posted On: 14 DEC 2018 7:10PM by PIB Delhi

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, on 2nd November 2018,launched a support and outreach programme for the Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) sector. The Prime Minister unveiled12 key initiatives which will help in the growth, expansion and facilitation of MSMEs across the country:

  1. Loans upto 1 crore within 59 minutes through an online portal.
  2. Interest subvention of 2% for all GST registered MSMEs on fresh or incremental loans.
  3. All companies with a turnover of more than 500 crores to be mandatorily on TReDS platform to enable entrepreneurs to access credit from banks, based on their upcoming receivables, thus, solving the problems of cash cycle.
  4. All PSUs to compulsorily procure 25 percent from MSMEs instead of 20 percent of their total purchases.
  5. Out of the 25 percent procurement mandated from MSMEs, 3 percent reserved for women entrepreneurs.
  6. All CPSUs to compulsorily procure through GeM portal.
  7. 100 Technology Centres to be established at the cost of Rs 6000 crore.
  8. Govt. of India to bear 70 percent of the cost for establishing Pharma clusters.
  9. Returns under 8 labour laws and 10 Union regulations to be filed once in a year.

10) Establishments to be visited by an Inspector will be decided through a computerised random allotment.

11) Single consent under air and water pollution laws. Returns will be accepted through self-certification and only 10 percent MSME units to be inspected.

12) For minor violations under the Companies Act, entrepreneurs no longer have to approach court but can correct them through simple procedures.

The Prime Minister said that there are five key aspects for facilitating the MSME sector:

· access to credit

· access to market

· technology upgradation

· ease of doing business

· sense of security for employees.

BUDGET THRUST TO THE MSME SECTOR

Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) sector has emerged as a highly vibrant and dynamic sector of the Indian economy over the last five decades. MSMEs play a crucial role in providing employment opportunities. MSMEs are complementary to big industries and   contribute greatly to the socio-economic development of the country. Keeping this in mind andthe growing role and contribution of the MSME sectorin boosting employment and economic growth, the Union Budget, presented by the Finance Minister on 1stFebruary 2018 in the Parliamenthas given the sector a big thrust by enhancing the budgetary allocation   from Rs. 6481.96 crore in 2017-18 to Rs.6552.61 crore in 2018-19.

  • The allocation for individual Schemes (apart from CGTMSE) has gone up by 59%, from Rs.3680 crore in 2017-18 to Rs. 5852.61 crore in 2018-19.

The allocation for National Manufacturing Competitiveness Program has gone up from Rs. 506 crore in 2017-18 to Rs. 1006 crore in 2018-19. This scheme will help technology up-gradation in the MSME sector.

  • Allocation under Prime Minister Employment Generation Programme has gone up from Rs. 1024.49 crore in BE 2017-18 to Rs. 1,800 crore in BE 2018-19 for generating self employment opportunities through establishment of about 88,000 micro enterprises in the non-farm sector and providing employment to around 7 lakh people.

The Credit Guarantee Fund has already been enhanced from Rs.2500 crore to Rs. 7500 crore. This enhancement along with other structural reforms in the Scheme is aimed at boosting credit growth and employment generation in the MSE sector in a big way.

There has been more than a threefold increase in the allocation for setting up of the state-of-the-art Technology Centres from Rs.150 crore in BE 2017-18 to Rs. 550 crore in BE 2018-19.

Allocation under Khadi Grant has been enhanced significantly from Rs.265.10 crore in BE 2017-18 to Rs. 415 crore in BE 2018-19.

Under Scheme for Fund for Regeneration of Traditional Industries (SFURTI), the budgetary allocation has increased from Rs.10 crore in BE 2017-18 to Rs. 125 crore in BE 2018-19. This will give an unprecedented boost to employment generation in the traditional and rural industries.

The allocation under ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industry and Entrepreneurship) has been raised from Rs. 50 crore in BE 2017-18 to Rs. 232 crore in BE 2018-19 with an aim to set up 100 livelihood business incubators and 20 technology business incubators. This will accelerate entrepreneurship and employment generation.

The allocation for National SC/ST Hub has been raised from Rs. 60 crore to Rs 93.96 crore with a view to giving an impetus to the growth of the business of SC/ST entrepreneurs. The overall allocations for the north-eastern region, for SC/ST components under various schemes have also witnessed significant increase.

            Other schemes that will give a boost to the MSME sector are:
  • Extension of reduced rate of 25 percent available at present for companies with turnover of less than 50 crore to companies reporting turnover up to Rs. 250 crore in Financial Year 2016-17.
  • Contribution of 8.33% of Employee Provident Fund (EPF) for new employees bythe Government for three years.
  • Contribution of 12% to EPF for new employees for three years by the Government in sectors employing large number of people like textile, leather and footwear.


SUCCESS STORY OF PMEGP

Prime Minister's Employment Generation Programme –To Continue till 2019-20

Prime Minister's Employment Generation Programme (PMEGP) is a major credit-linked subsidy programme being implemented by the Ministry of MSME since 2008-09. The Scheme is aimed at generating self-employment opportunities through establishment of micro-enterprises in the non-farm sector by helping traditional artisans and unemployed youth in rural as well as urban areas.

The Cabinet Committee on Economic Affairs on 28 FEB 2018 approved the continuation of (PMEGP) beyond 12th Plan for three years from 2017-18 to 2019-20 with a total outlay of Rs.5,500 crore.

Prime Minister Employment Generation Programme (PMEGP)Scheme will create sustainable estimated employment opportunities for 15 lakh persons in three financial years.

Allocation under PMEGP in Budget Estimates 2018-19 has already been enhanced to Rs. 1,800 crore from previous year’s allocation of   Rs. 1024.49 crore.

PMEGP is estimated to have generated over 11,13, 000 employments during the last three years i.e. 2015-16 to 2017-18.

A total of 4.55 lakh micro enterprises have been assisted with a margin money subsidy of Rs 9564.02 crore providing employment to an estimated 37.98 lakh persons from inception till 31.01.2018.

During the year 2018, Rs. 1760.64 crore has been released by the Ministry as margin money under PMEGP out of which Rs. 1007.52 crore has already been disbursed by the banks.

Under the PMEGP Scheme 35796 new enterprises providing employment to 286368 persons have been benefited.

There is more than 60% increase over the previous year in terms of funds disbursed by the banks, no of projects with funds disbursed and the employment generated.

A minimum target of 75 projects per district is awarded to all districts of the country to achieve Inclusive Growth. Higher rate of subsidy (25% to 35%) will be applicable for women, SC/ST, OBC, Physically Disabled, NER applicants in rural areas. Targets are fixed taking into account:

  1. Extent of backwardness of State;
  2. Extent of unemployment;
  3. Extent of fulfillment of previous year targets;
  4. Population of State/Union Territory; and
  5. Availability of traditional skills and raw material.


Under PMEGP 266 districts have achieved the target of 75 projects during 2016-17.

  • Allocation to all the districts with average Margin Money of Rs.2.00 lakhs per project (project cost Rs.8-10 lakh) in order to have equal distribution of targets and to achieve inclusive growth
  • Efforts are being made to achieve the target of 75 units for each district and Principal Secretaries of State Governments are monitoring the Scheme.
  • District level advisory committees headed by MPs districts also monitor the Scheme
  • Review meetings at state level are held regularly wherever low achievement has been observed.
  • During State Level Monitoring Committee Meetings (SLMC)financing bank branches of states are advised to sanction more PMEGP projects in poor performing districts
  • Awareness camps at district level and state level are organized to propagate the PMEGP scheme for the development of micro industries.
  • Under PMEGP, general category beneficiaries may avail of margin money subsidy of 25 % of the project cost in rural areas and 15% in urban areas.
  • For beneficiaries belonging to special categories like Scheduled Caste/Scheduled Tribe/OBC /Minorities/Women, Ex-serviceman, Physically Handicapped, NER, Hill and Border areas the margin money subsidy is 35% in rural areas and 25% in urban areas.
  • Any individual above 18 years of age is eligible.
  • For setting up of projects costing above Rs.10 lakh in the manufacturing sector and above Rs. 5 lakh in the business /service sector, the beneficiaries should possess at least VIII standard pass educational qualification.
  • The maximum cost of projects is Rs. 25 lakh in the manufacturing sector and Rs. 10 lakh in the service sector.
  • Benefit may be availed under PMEGP for setting up of new units only.


An online portal https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal/pmegphome/index.jsp has been introduced from 1st July 2016 for those who wish to avail benefits under the PMEGP scheme. Entire process is real time and online. The applicant has to apply on the portal and can track the status of the application on the PMEGP-e-portal. There is an online feedback mechanism for providing feedback by the beneficiaries.

Khadi and Village Industries Commission (KVIC) is the nodal implementation agency at the national level. At the State/district level, State offices of KVIC, Khadi and Village Industries Boards (KVIBs) and District Industry Centres (DIC) are the implementing agencies.

Assistance to Women Entrepreneurs under PMEGP

Government has provided financial assistance to women entrepreneurs in setting up 14,768 projects in 2016-17 under Prime Minister’s Employment Generation Programme (PMEGP) aimed at generating employment in rural and urban areas of the country.

The maximum number of 1,484 projects were from Assam, followed by 1,387 in Uttar Pradesh, 1,248 in Tamil Nadu, 942 in Odisha, and 915 in Bihar, besides other States/UTs with varying number of projects.

Under the PMEGP scheme women entrepreneurs are provided 25% and 35% subsidies for the project set up in urban and rural areas respectively.

MoUWITH AYUSH

Ministry of MSME and Ministry of AYUSH signed an MoU in June, 2018 in New Delhi. The MoU has created synergies through the institutions and schemes of both Ministries for the development of AYUSH enterprises in the country. The objective of this partnership is to position India as a world leader in “Holistic Healthcare”.

AYUSH is a rising sector, having immense potential for preventive, curative and rehabilitative health and has been part of India's socio-cultural heritage. AYUSH industry include the Ayurveda, Unani, Siddha and Homoeopathy drug manufacturing units as well as the healthcare delivery centers in public & private sectors and are essentially dominated by MSMEs, which need handholding in the areas of entrepreneurship development, capacity building and financial assistance in order to grow and increase the market share of AYUSH.

The domestic market for AYUSH sector has been increasing steadily over the past decade. There is also an acceptance of traditional medicines worldwide. Export of AYUSH products like food supplements, nutraceuticals and herbal extracts has increased significantly. In order to benefit from this the Ministries of MSME and AYUSH agreed to join hands for developing enterprises in this sector. Both Ministries are organizing regional workshops for entrepreneurship development in AYUSH sector and Ministry of MSME has framed new schemes for AYUSH industries to get the benefits of SIDBI.

UNITED NATIONS WOMEN’S DAY– 2018

On the occasion of International Women’s Day on March 8th 2018, the Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises(MSME) launched a portal for women entrepreneurs of India: www.udyamsakhi.org.

Around 8 million women have set up and are running their own businesses in India and the Ministry of MSME is committed to ensure that women in India continue to play a vital role in the growth of the Indian economy.

The portal is a network for nurturing entrepreneurship and creating business models for low cost products and services in order to empower women and make them self-reliant and self-sufficient.

The portal provides assistance through its platform for entrepreneurship learning tools, incubation facility,training programs for fund raising, providing mentors, one-on-one investor meet, provide market survey facility and technical assistance.

MSME Ministry is creating a vibrant MSME sector by promoting growth and development of this sector including Khadi, Village and Coir industries, in cooperation with the concerned ministries and departments, state governments and other stake holders.

KHADI AND VILLAGE INDUSTRIES COMMISSION

The President of India,Ram NathKovind launched the Solar Charkha Mission on 27th June,2018 at a function in New Delhi. This Mission cover 50 clusters across the country with a budget of Rs.550 crore for the year 2018-19 and 2019-20. The scheme will generate direct employment to nearly one lakh persons in rural areas and will also contribute to the green economy. Solar Charkha Units have been classified as village industries.The scheme of Solar Charkha Mission was proposed in the Union Budget 2018-19 to harness non-conventional solar energy to further employment generation.

KVIC Sets World Record in ‘Sweet Revolution’

In order to increase the production of honey KVIC has launched the honey mission. Beekeeping is suited to rural areas and available local resources and KVIC is playing a vital role in utilizing these resources for the benefit of villagers.

KVIC established a separate department called the Directorate of Beekeeping in Mumbai and Central Bee Research and Training Institute at Pune and started beekeeping in modern and scientific methods.

The apiary of Rashtrapati Bhavan has started giving yields and 186 kilograms of honey was extracted from the gardens of the Presidential House in March this year. Rashtrapati Bhavan has abundant flora and fauna, including lush trees of mangoes, Indian blackberries (jamun), neem and drumsticks.

KVIC had earlier conducted an apiculture training course for the gardeners of Rashtrapati Bhavan, in which they were provided tips to care and value of beekeeping in maintaining the flora and fauna. KVIC installed many bee-boxes in different phases in the Rashtrapati Bhavan. Rashtrapati Bhavan has plans to use this honey and related products as gift items for the visiting foreign dignitaries.

The KVIC beekeeping program in Rashtrapati Bhavan covers the 16,000 flowers and plants in the premises. The abundant trees on the premise of the Rashtrapati Bhavan is suitable for pollination which will massively increase the yield of the crops in the neighbouring areas.

Khadi and Village Industries Commission (KVIC) distributed 1,000 bee-boxes among 100 Mishing Assamese tribe in the Kaziranga forest area on May 21 this year on the occasion of World Honey Bee Day.

KVIC also distributed bee boxes in the Zangalee Army area at Kupwara, Kashmir in June this year. Two thousand three hundred thirty bee-boxes were distributed among 233 beneficiaries in the Zangalee Army area.

 The programme in Kupwara was held in association with the Indian Army under its Sadbhawna programme in order to establish peace and harmony in the valley.

Indian Army helped in providing training and also provided 10 percent finance for setting up of the apiaries. This has helped the beneficiaries to access the KVIC platform for earning a livelihood.

KHADI ON THE CATWALK

This year, for the first time, KVIC collaborated with Lakme Fashion Week to showcase Khadi as a fabric of sustainable development. Collections of hand-spun and hand-woven Khadi fabric made by four designer labels hit the ramp in the Lakmefashion week in Mumbai this year. Cluster areas of Elgandal (Telangana), Kanjarpur (Madhya Pradesh), Bastar (Chhattisgarh), Hoshiarpur (Punjab), Malda, Burdwan and Murshidabad (West Bengal) contributed the signature fabric of India Khadi for the fashion show.

Commemorating the 150th Birth Anniversary of Mahatma Gandhi

  • KVIC brought together Mahatma Gandhi’s dream of cleanliness and Khadi by selling customized Khadi uniform sets to Patna Municipal Corporation (PMC) for its 4,000 strongsafaikarmacharis.
  • In April 2018, KVIC launchedits store-locating Mobile App. This App will connect more than 4000 Khadi India outlets and give detailed location and availability of products at the stores to buyers at a single click on their mobile phones.
  • Khadi was showcased at South Africa on June 7 this year at the Pietermaritzburg Railway Station where Gandhi ji was thrown off a train for refusing to give up his seat in a first class, "whites-only" compartment, 125 years ago, in 1893.
  • The External Affairs Minister,SushmaSwarajtook the train journeyon June 7 this year from Pentrich to Pietermaritzburg. Hundreds of metres of Khadi, the hand spun and hand woven signature fabric of India synonymous with Mahatma Gandhi, adorned all the compartments and engine of the train which ran to commemorate that incident.
  • SushmaSwaraj also unveiled the bust of Mahatma Gandhi byspinning a charkha.


POPULARSING KHADI

            Raymond Khadi

  • Thecompany launched its Raymond Khadi in retail marketing byorganizing a Khadi Fashion showin the presence of the elite guests.


  • KVIC joined in the National Day event of Montenegro in India on July 13, 2018 in New Delhi. The event was named Trendy Montenegro with Indian Khadi. Diplomats donned the hand-spun, hand-woven, natural fibre.  
  • Khadi and Village Industries Commission (KVIC) dispatched its first consignment of Khadi products to the High Commission of Trinidad and Tobago on 2nd August 2018.



REVIVAL OF SICK KHADI INSTITUTIONS

In order to revive the sick Khadi Institutions, Khadi and Village Industries Commission (KVIC) implements ‘Strengthening of Infrastructure of Existing Weak Khadi Institutions and assistance for Marketing Infrastructure’ scheme.

The scheme is meant to meet need based support to the sick Khadi Institutions which have potential to attain normalcy. Sales performance of entire sector under Khadi and Village Industries has increased from Rs. 41894.56 crore in 2015-16 to Rs. 60451.28 crore in 2017-18.

There is no plan to reopen closed Khadi Gram Udyogcentres in different panchayats of the country.

TECHNOLOGY CENTRE SYSTEMS PROGRAMME (TCSP)

Ministry of MSME is implementing Technology Centre Systems Programme (TCSP) at an estimated cost of Rs. 2200 crore, including World Bank Loan assistance of USD 200 million, to establish 15 new Tool Rooms and Technology Development Centres (TCs) and upgrade the existing 18 TCs across the country.

Work on 10 Technology Centres at:

  • Rohtak
  • Bhiwadi
  • Baddi
  • Bengaluru
  • Durg
  • Puducherry
  • Vishakhapatnam
  • Sitarganj
  • Bhopal
  • Kanpur


  • Work on these Technology Centreshave already started and they will start functioning soon.
  • The contract for Technology Centres at Ernakulam and Imphal has been signed in the month of March, 2018.
  • Construction work has started for upgradation of 3 existing Technology Centres - Bhubaneswar, Mumbai and Aurangabad.
  • For development of North Eastern Region (NER), a special scheme has been framed under which setting up of Technology Centres at Tinsukia (Assam), Dimapur (Nagaland) and Agartala (Tripura) have been approved and work is in progress.


SMEs AND INTERNATIONAL COOPERATION

The Ministry of MSMEs, organized the first ever International SME Convention in New Delhi from 22nd to 24th April 2018. Delegates from 39 countries participated in the Convention.

Delegates attended the convention from Australia, Austria, France, Indonesia, Italy, Kenya, Korea, Malaysia, Morocco, Nigeria, Philippines, Poland, Russia, Spain, Sri Lanka, South Africa and UAE.

160 SMEs from these countries represented small enterprises of their countries in the sectors of agriculture, healthcare, strategic defence training, education, logistics, digital entertainment and waste management.

Poland, with 15 SMEs, had the largest delegation, followed by Uzbekistan with 8 SMEs and Ghana with 7. Four hundred SMEs from India also participated.

The Convention held a special session on the theme “Women Entrepreneurs - Sustainable Livelihoods to Successful Business” for women entrepreneurs from India, Finland, Italy, Russia and Cambodia who shared their experiences of success and obstacles faced by them.

MSME Ministry is in the process of drafting strategies for encouraging women to set up their own businesses.

Twenty-three agreements were signed between SMEs of India and SMEs of UK, Russia, Uzbekistan, Poland, Bhutan, Austria, Czech Republic, Cameroon and Sri Lanka. These agreements are in 12 sectors:

  • food processing
  • agriculture
  • textiles
  • defence
  • ammunition
  • waste management
  • dairy products
  • coal
  • jewellery
  • health care
  • Education


Four foreign SMEs also signed Expression of Interest for entering into joint ventures with Government of India.

The Ministry is setting up a Digital Trade Desk aimed at furthering more collaborations between SMEs of India and other countries and for exchange of data.

The SMEConvention will be an annual feature with 79 countries showing interest to participate in the next convention.

During the 2018 Convention around 150 exhibitors from India and abroad had set up stalls showcasing their business and products.

During the inaugural function 35 of India’s Small Giants were felicitated by the Minister of MSME Ministry. The companies felicitated are dealing with logistics, bio-technology, pharma, semi-conductors, textiles, gems and jewellery, security and chemicals.

During the 2 days’ SME Convention a Khadi fashion show called “Transcending Boundaries” was held. The show curated by Sunil Sethi of the Fashion Design Council of India and featured designs made from Khadifabric by Rohit Bal, Anju Modi, Payal Jain and Poonam Bhagat.


INTERNATIONAL COOPERATIONS

Inauguration  of India-Korea Technology Exchange Centre

The India-Korea Technology Exchange Centre was inaugurated by the Minister of State (I/C) MSME, Giriraj Singh and Minister of SMEs and Start-ups of Republic of Korea, Hong Jong -hak on 10th July,2018 in New Delhi.

The purpose of the Technology Exchange Centre is to:

create a platform for micro, small and medium enterprises of India and Korea where they can be assisted to identify and exchange latest technologies, share management expertise, product development and technology applications for product development.
The Technology Centre will work towards building reliable alliances in space, solar energy, nano technologies and other developing technologies.
Many Korean organizations have shown interest to initiate technology transfers in MSME sectors between the two countries and this Centre will provide them reliable partners for effecting business alliances.

Enhanced Cooperation Between India and Morocco

India and Morocco signed an MoU for deepening cooperation between MSME sectors of the two countries in Rabat, Morocco this year. The MoU was signed by CMD, National Small Industries Corporation (NSIC), RavindraNath and Director General, Maroc PME, Mr. RabriBarrazoukaon 26th September 2018. Through this MOU, the NSIC and Maroc PME will work together to enhance cooperation opportunities for MSMEs of both countries. It will facilitate transfer of Indian technologies and products to Morocco.

            Bilateral meetings were held between India and Morocco for further enhancing cooperation in MSME Sector and both sides discussed ways and means to synergize the strengths of both countries in the MSME sector in terms of capacity building, sharing of experiences, exchange of business delegations for creating linkages, JVs and technology transfers.

MoUBetween India and Russia on Cooperation in the Field of MSME

The Union Cabinet approved signingof a Memorandum of Understanding (MoU) between National Small Industries Corporation Ltd. (NSIC) - a Public Sector Undertaking of the Ministry of Micro, Small & Medium Enterprises (MSME) of the Republic of India and JSC-Russian Small & Medium Business Corporation (RSMB Corporation), Russia.The MoU was signed during the visit of Russian President to India in October,2018.

The objective of the MoU is to promote cooperation between the Small & Medium Enterprises (SMEs) of the two countries.

  • It will provide a structured framework and enabling environment to the MSME sector of the two countries to understand each other's strengths, markets, technologies and policies.
  • It aims to enhance enterprise to enterprise cooperation and help initiate sustainable business alliances in terms of technology transfers, joint ventures and business partnerships in MSME sector between the two countries.
  • Cooperation in the field of capacity building, rapid incubation for entrepreneurship development, exposure to each other's market by encouraging participation in exhibitions are also envisaged in this MoU.
  • This cooperation is expected to open doors to new opportunities for Indian MSME sector by way of new markets, joint ventures, sharing of best practices and technology collaborations.

Indian SMEs Delegation Participates in 8th European SMEs Congress in Poland

A delegation of 32 Indian SMEs participated in the 8th European Congress on SMEs at Kotawice, Poland, heldfrom 17thto 19th October, 2018. India is home to more than 60 million MSMEs, which have the ability and capability to access international markets and work as ancillaries to large international companies. These MSMEs provide livelihood to more than 100 million people and create value for the entire global community. It is imperative to integrate Indian SMEs into the global value chain by establishing linkages with international partners.In order to fructify the opportunities for Indian SMEs, theCongress was anopportunity to make direct business relations between European and Indian SMEs.

Small and Medium Enterprises from around 50 countries   participated in the 3-day event. The main theme of the event was “Business-Self-Government Together for Economy”.

The organizers   allotted a special session of one and a half hour for discussion about trade and business opportunities with India and Indian SMEs.

The Indian delegation showcased Indian products and services at the Expo in the Indian Pavilion.

India-Taiwan SME Development Forum

India- Taiwan SME Development Forum was held at Taipei, Taiwan, from 13th to 17th November, 2018.

  • The MSME sector in India occupies a position of strategic importance.
  • At present there are over 63 million MSMEs across various industries that employ more than 111 million people and produce more than 8,000 products, ranging from traditional to high-tech precision items.
  • The MSME sector is the second largest employment generating sector in India after agriculture.
  • In order to promote a culture of entrepreneurship Government of India has launched programs like Start Up India and Stand Up India whichhas resulted in India having the 3rd largest start up ecosystem in the world with more than 26,000 start-ups.
  • Sectors like electronics, auto-components, textiles, automobiles, bamboo industry, in which Taiwan has largest concentration, are of special interest to India.
  • Twenty enterprises from India in the field of general engineering, auto components, electronics & plastics attended the forum with the aim of seeking linkages in their respective fields with their Taiwanese counterparts.
  • The MSME Ministry has launched an International Cooperation Scheme for the Indian MSMEs with the objective of technology infusion and upgradation and their modernization and promotion of exports.


MSME CONVENTIONS

Udyam Sangam-2018

To mark the UN SME Day on 27th June,2018, the M/o MSME organizedthe Convention- Udyam Sangam-2108 for the MSME sector in the country, which was inaugurated by President of India, Ram NathKovind, in New Delhi.

‘Sampark’ portal of the Ministry of MSME was also unveiled by the President. This portal isa bridge between the talent pool and enterprises seeking trained man power.

Nearly three thousand delegates from Ministries and Departments of Central Government, State and Union Territories, Autonomous Bodies, MSME Associations, Non-Banking Financial Corporations, Private Sector and Public Sector Banks, Venture Capitalists, Entrepreneurs and Self Help Groups participated in the day long convention.

They deliberated upon a range of issues that included MSME Credit, entrepreneurship of aspirational groups and regions, agri-business enterprises, challenges before Services, Knowledge and Manufacturing Sectors, women entrepreneurs, development and strengthening of access to market and health care and Ayush enterprises. In order to develop a system for creating awareness about Government schemes, a session on communication and media was also held.

The Conclave was organized with the purpose of encouraging dialogue and partnerships among various stakeholders of the MSME ecosystem for promoting innovation and knowledge sharing on MSME related issues.

It was also aimed at creating awareness about the MSME sector at the national level and assuring through declaration of specific measures for knowledge, marketing, technical and financial handholding by the Government of India of the MSME Sector at the grass-root level.

“UdyamSangam2018” is a step forward towards consolidating the convergence and synergy of all the government initiatives relating to the MSME sector.

The UN General Assembly in its 74th Plenary held on the 6th April, 2017 declared 27thJune as Micro, Small and Medium-sized Enterprises Day, recognizing the importance of micro, small and medium-sized enterprises in achieving sustainable development goals and in promoting innovation, creativity and sustainable work for all.

UdyamSamvad

A two-days’ Conference of Development Institutes, Technology Centres and Tool Rooms titled UdyamSamvad was organized by the Ministry of MSME on 16th-17th April,2018 in New Delhi.

The aim of the conference was to give wide publicity to the successful ventures of the MSME Ministry like clusters and tool rooms so that many more could be set-up in the country.

The aim of the conference was greater dissemination of information about schemes for MSMEs in different Ministries and through the conference the Ministry worked to reachthe village level for which Development Institutes were urged to coordinate with district functionaries.



INFORMATION AND AWARENESS

E-Newsletter of MSME Ministry

MSME Ministry launched a monthly e-newsletter called‘[MSME Insider’on 19th September,2018 in New Delhi.

  • The e-newsletter gives information about the activities undertaken by the Ministry and also connects the Ministry with the millions of MSME units spread out across the country.
  • The e-newsletter assists in the regular flow of information about the sector to the MSMEs and also helps in developing a two-way communication between the Ministry and its stakeholders.
  • Apart from providing information to MSMEs and the general public about Ministry’s Schemes, the e-newsletter provides information about latest innovations in technology, upcoming events and training programsfor the month and also carries interesting articles on relevant topics and success stories of the entrepreneurs who have benefitted from the schemes of the Ministry.
  • The e-newsletter is available on the website of the Ministry www.msme.gov.in as well as on the websites of its attached organizations and is also distributed to about 50 lakh MSMEs registered on theUdyogAadhaar Memorandum Portal.  


E- Initiatives

A portal of the Ministry of MSME called “Sampark” was unveiled by the President of India, Ram NathKovind,on 27th June,2018,on the occasion of UN SME Day, in New Delhi. The portal acts as a bridge between the talent pool and those enterprises seeking trained man power.

AWARDS AND REWARDS

At the end of the International Trade Fair this year, on 27th November, at PragatiMaidan, the Ministry of MSME received the Silver Medal while KVIC won the Bronze Medal for their pavilions in the Ministries and Departments, PSUs, PSB and Commodity Boards category.

***

Source: PIB
Click on the desired scheme to know the detailed information of the scheme
किसी भी योजना की विस्‍तृत जानकारी हेतु संबंध्‍ाित योजना पर क्लिक करें 
pm-awas-yojana pmay-gramin pmay-apply-online sukanya-samriddhi-yojana
digital-india parliamentray-question pmay-npv-subsidy-calculator success-story
faq mann-ki-bat pmjdy atal-pension-yojana
pm-fasal-bima-yojana pmkvy pmegp gold-monetization-scheme
startup-india standup-india mudra-yojana smart-cities-mission