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2020-01-18

मेधावी छात्राओं को मिलने वाली स्कूटी की संख्या बढ़ाने को सीएम ने दी मंजूरी

मेधावी छात्राओं को मिलने वाली स्कूटी की संख्या बढ़ाने को सीएम ने दी मंजूरी


सीएम देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत मेधावी छात्राओं को दी जाने वाली स्कूटी की संख्या 1000 से बढ़ाकर 1500 करने की भी स्वीकृति दी इस संबंध में पत्रिका की ये रिपोर्ट पढ़ें:

पत्रिका: जयपुरI प्रदेश में जनजाति क्षेत्रीय विभाग की ओर से टीएसपी एवं माड़ा क्षेत्र के मेधावी जनजाति बालिकाओं को वितरित की जाने वाली स्कूटी की संख्या 2019-20 में 4000 से बढाकर 6000 करने को सरकार ने मंजूरी दे दी है। 

सीएम गहलोत ने देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत मेधावी छात्रा को दी जाने वाली स्कूटी की संख्या भी वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1000 से बढाकर 1500 करने को भी स्वीकृति दी। मुख्यमंत्री के इस फैसले से बालिकाएं आगे पढाई करने के लिए प्रोत्साहित होगी और इससे सीधे तौर पर बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

अनुसूचित जाती एवं अल्पसंख्यक छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी

मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाती और अल्पसंख्यक वर्ग की मेधावी छात्राओं को भी कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से अब अनुसूचित जाती एवं अल्पसंख्यक वर्ग की मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिल सकेगी। बता दे की गहलोत ने साल 2019-20 के बजट में इसकी घोषणा की थी।

कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में समाहित होंगी शेष योजनायें 

मुख्यमंत्री ने कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में टीएडी विभाग द्वारा संचालित योजना के साथ-साथ उच्च शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक मामलात विभाग तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अनुसूचित जाती, ओबीसी, अल्पसंख्यक एवं सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) की मेधावी छात्राओं के लिए संचालित स्कूटी वितरण योजनाओं को समाहित करने को मंजूरी दी है। अब जनजाति की मेधावी छात्राओं के साथ-साथ इन सभी वर्गों की मेधावी छात्राओं को "कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना" के तहत स्कूटी योजना का लाभ मिलेगा।

देवनारायण स्कूटी योजना पहले की तरह संचालित होगी

देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना पहले की तरह ही अपने नाम से संचालित होगी, जबकि शेष स्कूटी योजनायें कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में समाहित हो जायेगी। टीएडी विभाग की ओर से संचालित स्कूटी योजना में 10वी कक्षा उत्तीर्ण करने वाली मेधावी छात्राओं को भी पूर्ववत स्कूटी मिलेगी। इससे मेधावी छात्राओं को 11वी कक्षा में नियमित प्रवेश लेने के लिए प्रोत्साहन मिल सकेगा।

स्रोत: पत्रिका
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सरकार ने खत्म की स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यता, अब राशन कार्ड से भी हो जाएगा इलाज

सरकार ने खत्म की स्मार्ट कार्ड की अनिवार्यता, अब राशन कार्ड से भी हो जाएगा इलाज


मरीजों को इलाज के लिए केवल अपना राशनकार्ड और आधार कार्ड अथवा ऐसा ही कोई शासकीय पहचान पत्र अस्पताल में दिखाना होगा। मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना में 50 हजार तक फ्री इलाज की सुविधा पाने वालों को भी केवल राशनकार्ड और कोई एक पहचान पत्र दिखना पड़ेगा। इस संबंध में न्यूज 18 हिन्दी की ये रिपोर्ट पढ़ें:

न्यूज 18 हिन्दी : रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ने मरीजों को इलाज के लिए एक बड़ी सौगात दे दी है. डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 5 लाख तक के फ्री इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड (Smart Card) की अनिवार्यता सरकार ने खत्म कर दी गई है. मरीजों को इलाज के लिए केवल अपना राशनकार्ड (Ration Card) और आधार कार्ड (Adhar Card) अथवा ऐसा ही कोई शासकीय पहचान पत्र अस्पताल में दिखाना होगा. मुख्यमंत्री विशेष सहायता योजना में 50 हजार तक फ्री इलाज की सुविधा पाने वालों को भी केवल राशनकार्ड और कोई एक पहचान पत्र दिखना पड़ेगा. जानकारी के मुताबिक ये नया नियम शुक्रवार से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है. जानकारी के मुताबिक प्रदेश में पांच लाख तक फ्री इलाज की पात्रता रखने वाले हितग्राहियों की संख्या 56 लाख है. 50 हजार तक फ्री इलाज के हितग्राही 16 लाख हैं.  दोनों के लिए इलाज की स्कीम अलग-अलग है.

नियम में राज्य सरकार ने किया बदलाव

छत्तीसगढ़ सरकार ने दोनों फ्री इलाज योजना में बड़ा बदलाव कर दिया है. अफसरों के मुताबिक सॉफ्टवेयर के डेटाबेस से स्मार्ट कार्ड के आंकड़े हटा दिए गए है. अब मरीज और उनके परिजनों को पंजीकृत अस्पतालों में फ्री इलाज के लिए राशन कार्ड के अलावा पहचानपत्र के रूप में प्राथमिक, अंत्योदय राशन कार्ड, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे कोई न कोई शासकीय पहचानपत्र लेकर जाना पड़ेगा. राशनकार्ड के अलावा सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण 2011 के हितग्राहियों को योजना का लाभ पहले की तरह मिलता रहेगा. सॉफ्टवेयर इन मरीजों की पहचान अब नए फार्मूले से करेगा. ये फॉर्मूला सॉफ्टवेयर में अपलोड कर दिया गया है.

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए ये निर्देश

डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना लागू होने के पहले अस्पतालों और कियोस्क सेंटरों में ई-कार्ड बनाने का काम चल रहा था. इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है. पहले बने हुए ई-कार्ड में किसी तरह की परेशानी आने पर लोग अस्पताल व कियोस्क सेंटर में जाकर ई-कार्ड में सुधार और बदलाव करा सकेंगे. उन्हें पुराने के बदले नए कार्ड जारी किए जाएंगे. इस संबंध में अस्पताल और कियोस्क सेंटर प्रभारियों को निर्देश दिए जा चुके है. स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने निर्देश दिए है कि आयुष्मान योजना के सॉफ्टवेयर की तरह नई योजना का सर्वर फास्ट होना चाहिए, क्योंकि स्लो सर्वर से मरीजों को इलाज और पंजीयन के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.

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22 जनवरी को सीएम करेंगे रूफ टॉप सोलर योजना शुरू

22 जनवरी को सीएम करेंगे रूफ टॉप सोलर योजना शुरू


सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा, सीएम रूफ टॉप सोलर योजना का शुभारंभ 22 जनवरी को करेंगे। इस योजना में एक से 10 किलोवाट तक के प्लांट पर 20 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। इस संबंध में अमर उजाला की ये रिपोर्ट पढ़ें:

सार
  • सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा, शुरू होगी सीएम रूफ टॉप सोलर योजना 
  • 22 जनवरी को सीएम करेंगे योजना की लांचिंग
  • 20 लाख घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्लांट लगाने पर मिलेगी सब्सिडी 

विस्तार
पिरूल से बिजली बनाने व पर्वतीय क्षेत्रों में सब्सिडी आधारित सोलर योजना शुरू करने के बाद अब प्रदेश सरकार ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत प्रदेश सरकार रूफ टॉप सोलर स्कीम शुरू करेगी। 22 जनवरी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसका शुभारंभ करेंगे। इस योजना में एक से 10 किलोवाट तक के प्लांट पर 20 से 40 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। 
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस क्रम में सरकार बिजली के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए नई योजना लागू करने जा रही है। इस योजना से जुड़कर प्रदेश के 20 लाख घरेलू उपभोक्ता सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। योजना के तहत 15 वेंडर सूचीबद्ध कर दिए गए हैं। 

आवेदन की प्रक्रिया उत्तराखंड पावर कारपोरेशन (यूपीसीएल) की वेबसाइट पर ऑनलाइन होगी। चयनित आवेदकों के घर पर यूपीसीएल के सूचीबद्ध वेंडर सौर संयंत्र लगाएंगे। आवेदक को सब्सिडी छोड़कर शेष धनराशि वेंडर को देनी होगी। संयंत्र लगने पर सब्सिडी का पैसा यूपीसीएल वेंडर के खाते में भेज देगा। 

दो मेगावाट क्षमता का लक्ष्य
नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं को सोलर रूफ टॉप प्लांट लगाने के लिए दो मेगावाट क्षमता का लक्ष्य दिया गया है। यदि मांग बढ़ती है तो इसे बढ़ाया जा सकता है। अघरेलू उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी की सुविधा नहीं है। संयंत्र लगाने पर उनके बिजली बिलों को नेट मीटर बिलिंग सिस्टम के जरिये पैसा कमाने की सुविधा होगी।

सोलर प्लांट की लागत
क्षमता (केवी)            लागत            सब्सिडी        
01                        50800                20320        
02                        101600            40640        
03                        152400                60960    
5                            244500            78240        
10                        489000                127140    
नोट: क्षमता किलोवाट में और लागत/सब्सिडी/ खर्च रुपये में    

ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह अनूठी योजना है। इससे जुड़कर वे अपने बिजली के बिल को कम कर सकते हैं साथ ही  पैसा भी कमा सकते हैं। सरकार चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ रही है। पिरूल से बिजली पैदा करने और पहाड़ में सोलर प्लांट लगाने की योजना शुरू करने के बाद यह हमारा तीसरा बड़ा कदम है। इसके बाद हम फ्लोटिंग सोलर संयंत्र पर जाएंगे। - राधिका झा, सचिव ऊर्जा

स्रोत : अमर उजाला
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दिव्यांगों के लिए वरदान है संबल योजना

दिव्यांगों के लिए वरदान है संबल योजना


संबल योजना के तहत दिव्यांगों के बीच नि:शुल्क उपकरण वितरण किए जा रहे हैं। व्हील चेयर, ट्राई साइकिल, हेयरिग एड तथा वैशाखी जरूरत के अनुसार दिया जाता है। इस संबंध में जागरण की ये रिपोर्ट पढ़ें:

जागरण : जहानाबाद : सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री दिव्यांग सशक्तिकरण योजना संबल दिव्यांगजनों के लिए वरदान साबित हो रहा है। योजना का लाभ लेने में निश्शक्त रुचि ले रहे हैं। संबल योजना के तहत दिव्यांगों के बीच निश्शुल्क उपकरण वितरण किए जा रहे हैं। व्हील चेयर, ट्राई साइकिल, हेयरिग एड तथा वैशाखी जरूरत के अनुसार दिया जाता है। योजना की लाभ उठाने के लिए दिव्यांगजनों को ज्यादा इधर-उधर भाग दौड़ करने की जरूरत नहीं पड़ता है। सामाजिक सुरक्षा कोषांग द्वारा वित्तिय वर्ष 2018-19 तथा 2019-20 में अब तक मुख्यमंत्री दिव्यांग सशक्तिकरण योजना संबल के माध्यम से एलिम्को कानपुर एव सीआरसी पटना के सहयोग से 570 दिव्यांगजनों के बीच ट्राई साइकिल का वितरण किया गया है। जिलाधिकारी नवीन कुमार के प्रयास से निगमित सामाजिक उतरदायित्व के तहत बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के माध्यम से 100 तथा एनटीपीसी लिमिटेड के सौजन्य से 50 ट्राईसाइकिल का वितरण दिव्यांगजनों के बीच किया गया है। साम‌र्थ्य के तहत 94 ट्राईसाइकिल, 50 व्हील चेयर, 16 हेयरिग एड तथा 20 वैशाखी दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक अभय कुमार ने बताया कि निशक्तजनों को प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए चिकित्सकीय टीम का गठन किया गया है। प्रमाण पत्र के आधार पर साइकिल दिया जाता है। प्रभारी सीडीपीओ अर्चना कुमारी ने बताया कि निश्शक्तों का सहयोग करना मानव का कर्तव्य होता है। समाज के गणमान्य लोगों के अलावा त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों से दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ उठाने में सहयोग करने का आग्रह किया।

स्रोत : जागरण
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दुर्घटना सहायता योजना में मिलेगी Rs.1 लाख की मदद

दुर्घटना सहायता योजना में मिलेगी Rs.1 लाख की मदद


18 से 70 वर्ष आयु के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना लागू की है। यह योजना पूरी तरह से निशुल्क है। इस संबंध में दैनिक भास्कर की ये रिपोर्ट पढ़ें:

दैनिक भास्कर : डीसी धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा राज्य के 18 से 70 वर्ष आयु के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना लागू की है। योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु या अपंगता होने पर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। यह योजना पूरी तरह से निशुल्क है। पात्र लाभार्थियों को योजना के तहत किसी भी प्रकार के प्रीमियम का भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत आने वाले केस इस योजना में कवर नहीं होंगे। बताया कि यह एक दुर्घटना बीमा योजना है।

पीएम सुरक्षा योजना लाभार्थी नहीं होंगे कवर : नई योजना के तहत कवरेज के दायरे में केवल वही हरियाणा निवासी और राज्य के मूल निवासी आएंगे, जोकि नामांकन न होने या किसी अन्य कारण से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत लाभ उठाने में सक्षम नहीं हैं।

इन हालात में नहीं मिलेगी मदद : योजना के तहत युद्ध और इससे संबंधित खतरे, परमाणु जोखिम और जानबूझ कर स्वयं को चोट पहुंचाने, आत्महत्या या आत्महत्या का प्रयास, मादक पेय या मादक पदार्थों के कारण, यात्री के रूप में हवाई यात्रा के अलावा हवाई गतिविधियों में लिप्त होने तथा आपराधिक इरादे से किसी भी कानून का उल्लंघन करने के मामले शामिल नहीं हैं।

ऐसे मिलेगा योजना का लाभ : योजना के तहत पीएमएसबीवाई के अंतर्गत स्वीकृत लाभ का 50 प्रतिशत लाभ मिलेगा। अर्थात दुर्घटना मृत्यु के लिए एक लाख रुपए और दुर्घटना के कारण दोनों आंखों की पूर्ण या रि-कवरेबल हानि या दोनों हाथों या पैरों की हानि या एक आंख की दृष्टि खोने या हाथ या पैर की हानि के मामले में एक लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है। दिव्यांगता के मामले में लाभ का भुगतान दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को किया जाएगा। जबकि मृत्यु के मामले में लाभ वरीयता के आधार पर जीवित पति या प|ी (यदि पुनर्विवाह न किया हो), सभी अविवाहित बच्चों को बराबर हिस्सा, माता तथा पिता को दिया जाएगा। योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित या पात्र संबंधी (मृत्यु के मामले में) द्वारा आवेदन संबंधित जिला के जिला समाज कल्याण अधिकारी को किया जाएगा। जहां दुर्घटना पीड़ित दुर्घटना के समय रहता था। राशि का भुगतान सीधा पात्र के बैंक खाते में होगा।

कुरुक्षेत्र | उपायुक्त धीरेंद्र खडग़टा अधिकारियों की बैठक लेते हुए।

ये दिखाने होंगे दस्तावेज

इस योजना के तहत मृत्यु के मामले में जमा करवाए जाने वाले दस्तावेजों में दावा फार्म, हरियाणा डोमिसाइल सर्टिफिकेट और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी राज्य में निवास का प्रमाण पत्र, दुर्घटना पीडि़त का आयु प्रमाण, दुर्घटना पीड़ित और पात्र रिश्तेदार (मृत्यु के मामले में) का आधार कार्ड, एफआईआर या पुलिस रोजनामचा रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र और यदि दावेदार जीवित पति या प|ी है तो इस बारे हलफनामा कि उसने पुनर्विवाह नहीं किया है, देना होगा। इसी तरह दिव्यांगता के मामले में दावा फार्म, हरियाणा डोमिसाइल प्रमाण पत्र और सक्षम प्राधिकारी द्वारा राज्य में निवास का प्रमाण पत्र, आयु का प्रमाण, आधार कार्ड और दिव्यांगता की प्रतिशतता तथा उसके प्रकार की पुष्टि करते हुए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी मेडिकल सर्टिफिकेट, मेडिको-लीगल रिपोर्ट शामिल होंगी। मृत्यु की तिथि के छह महीने बाद, दिव्यांगता की तिथि से 12 महीनों बाद दावों पर विचार नहीं होगा।

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पीएम आवास योजना: ईडब्ल्यूएस में फायदे के लिए आवेदन तिथि 15 तक बढ़ाई

पीएम आवास योजना: ईडब्ल्यूएस में फायदे के लिए आवेदन तिथि 15 तक बढ़ाई


प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग के लाभार्थी को घर बनाने के लिए अनुदान प्राप्त करने का सुनहरा मौका मिल रहा है। इस संबंध में दैनिक भास्कर की ये रिपोर्ट पढ़ें:

दैनिक भास्कर : जयपुर। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूेस) के पट्टेधारियों को लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण के लिए अनुदान प्राप्त करने का सुनहरा मौका मिल रहा है। इस योजना में ऑनलाइन आवेदन की तिथि 15 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। जानकारी हो कि योजना के तहत डेढ़ लाख रुपए तक का अनुदान देय है। अभी तक योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 16 जनवरी थी। योजना के अंतर्गत जेडीए की योजनाओं में नए आवास निर्माण के लिए लाभ मिलेगा।

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प्रधानमंत्री आवास योजना: पैसा लेकर घर न बनाने वालों की अब खैर नहीं, जल्द होगी वसूली

प्रधानमंत्री आवास योजना: पैसा लेकर घर न बनाने वालों की अब खैर नहीं, जल्द होगी वसूली


प्रधानमंत्री द्वारा जरुरतमंदों और बेघर लोगों के लिए पक्के मकान देने के लिए शुरू किया गया योजना "प्रधानमंत्री आवास योजना" के तहत यदि कोई व्यक्ति पैसा लेकर घर न बनाए तो उन लोगों की खैर नहीं, उनका पैसा वापस वसूला जाएगा. इस खबर को और अधिक विस्तार से पढने के लिए अमर उजाला के इस रिपोर्ट को पढ़ें:

अमर उजालादेहरादून में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पैसा लेकर मकान न बनाने वाले 40 लाभार्थियों से वसूली की जाएगी। जबकि 60 लोग चिह्नित किए जा रहे हैं। इसके अलावा ऐसे लोगों की भी जांच की जा रही है जिन्होंने खुद को फर्जी तरीके से पात्र दर्शाया था। 

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिले में 2,540 लाभार्थियों को मकान बनाने के लिए चुना गया था। पैसा जारी करने के बाद ग्राम्य विकास अभिकरण को स्थलीय निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जिले के कई गांवों में ऐसे लाभार्थी भी मिले, जिन्होंने शुरूआत की किश्त तो ली लेकिन मकान का निर्माण शुरू नहीं कराया। कई भूमिहीन लोगों को जब दूसरी जगह जमीन दिलाई गई तो वे अपने-अपने स्थान से जाने को तैयार नहीं हुए।

लिहाजा, जांच के बाद उन्हें पात्रता से बाहर कर दिया गया। अभिकरण ने जिले में ऐसे 100 से अधिक लाभार्थियों को चिह्नित भी किया था। अभिकरण से मिली जानकारी के अनुसार ऐसे लगभग 40 लोगों से वसूली प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा कई अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है। 

कितना मिलता है पैसा

इस योजना के तहत 1.30 लाख रुपये नगद दिए जाते हैं। जबकि, मनरेगा के 90 कार्यदिवस की मजदूरी दी जाती है। इसके अलावा 12 हजार रुपये शौचालय बनाने को दिए जाते हैं। जानकारी के अनुसार कई ऐसे लोग भी इनमें शामिल थे, जिनके पास भूमि नहीं थी। लिहाजा, उन्हें भूमि भी उपलब्ध कराई गई थी। 

तीन किश्तों में मिलता है पैसा 
पहली किश्त : 60 हजार रुपये नींव और दीवारों के लिए। 
दूसरी किश्त : 40 हजार रुपये छत डालने के लिए।
तीसरी किश्त : 30 हजार रुपये दरवाजे खिड़की आदि के लिए।

स्रोत: अमर उजाला
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किसानों की योजना के पैसे खर्च नहीं कर पा रही सरकार

किसानों की योजना के पैसे खर्च नहीं कर पा रही सरकार


प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के हित में शुरू की गयी योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पूरी राशि चालू वित्त वर्ष में खर्च नहीं हो पायेगी, ऐसी उम्मीद लग रही है. क्योकि कुछ राज्यों में तो इस योजना को लागू ही नहीं किया गया. जिस कारण लगभग 20% राशि बच जाएगी. इस खबर को और अधिक विस्तार से पढने के लिए आज तक की ये खास रिपोर्ट को पढ़ें:


  • चालू वित्त वर्ष में पीएम-किसान योजना के तहत 20% बजट बच सकता है
  • चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार ने 75,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है


बीते साल अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने देश के किसानों को एक बड़ी सौगात दी थी. दरअसल, सरकार ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का ऐलान किया था. हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में इस योजना की पूरी राशि खर्च होने की संभावना कम है. न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में 20 फीसदी बजट बचा रह जाएगा.

20 फीसदी राशि बचने की उम्‍मीद

न्‍यूज एजेंसी को योजना के कार्यान्वयन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि वित्त वर्ष के आखिर तक तकरीबन 60,000 करोड़ रुपये तक की राशि खर्च हो सकती है. इस तरह 15,000 करोड़ रुपये यानी कुल बजट का तकरीबन 20 फीसदी राशि बिना खर्च किए बची रह सकती है. यहां बता दें कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 में आवंटित 75,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है, जिसमें से अब तक 50,000 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं हुए हैं.

कितने किसानों ने कराया रजिस्‍ट्रेशन?

सरकार का अनुमान था कि देश के करीब 14.5 करोड़ किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जबकि अब तक इस योजना के तहत करीब 9.5 करोड़ किसानों ने रजिस्‍ट्रेशन करवाया है. वहीं योजना का लाभ तकरीबन 8.6 करोड़ किसानों को मिला है. हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत किसानों के ऑनलाइन रजिस्‍ट्रेशन के लिए किसान सम्मान निधि पोर्टल शुरू किए जाने के बाद रजिस्‍ट्रेशन की रफ्तार में तेजी आई है. पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 17 जनवरी, 2020 तक 9,46,06,054 किसानों का रजिस्‍ट्रेशन हुआ है.

पश्चिमी बंगाल में नहीं हुआ लागू

पश्चिमी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब तक पीएम-किसान योजना को अपने राज्य में स्वीकृति नहीं दी है, जिसके चलते पश्चिम बंगाल के तकरीबन 68 लाख किसान इस योजना के लाभ से वंचित हैं. योजना शुरू होने के बाद कुछ अन्य राज्यों की सरकारों ने भी इस योजना में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी, जिससे शुरुआती दौर में उन राज्यों के अनेक किसानों को इस योजना के लाभ से वंचित रहना पड़ा.

दिसंबर 2018 से मिल रहा लाभ

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत पिछले साल फरवरी में हुई थी, लेकिन किसानों को योजना का लाभ एक दिसंबर, 2018 से ही मिल रहा है और योजना की किस्त पिछले साल मार्च से ही सीधे लाभार्थी किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर की जा रही है. वहीं योजना के लिए शतप्रतिशत फंड केंद्र सरकार देती है और इसके तहत लाभार्थी किसानों को सालाना 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है. इस योजना के प्रत्येक लाभार्थी किसान को एक किस्त में 2,000 रुपये दी जाती है.

स्रोत: आज तक
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