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पूरी तरह से किसानों पर फोकस है इस बार का बजट, आय बढ़ाने पर है पूरा जोर

पूरी तरह से किसानों पर फोकस है इस बार का बजट, आय बढ़ाने पर है पूरा जोर



वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में किसानों की आय पर जोर देते हुए अनेक योजनाओं को सुदृढ़ करने का निश्चय किया है. इस पर उन्होंने कहा कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना कर दिया जायेगा. इस बजट में किसानो के बारे में ज्यादा सोचा गया है. इस खबर को और किसानो के लिए किया गया काम के बारे में जानने के लिए जागरण के इस रेपोर्ट को पढ़ें:

जागरणरवि शंकर। वर्ष 2020-21 के बजट में खेती के लिए 2.83 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो पिछले वर्ष से मात्र दस हजार करोड़ रुपये ज्यादा है। हालांकि इस बार बजट में उत्पादों के भंडारण पर विशेष जोर दिया गया है तथा किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए सरकार ने किसान रेल चलाने का भी फैसला किया है ताकि किसान जल्दी खराब होने वाली चीजों को सही समय पर बाजारों तक पहुंचा सकें। लेकिन इसकी शुरुआत कब होगी, यह तय नहीं हो पाया है।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए वित्त मंत्री ने सभी तरह के उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल तथा जीरो बजट प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। सरकार ने किसानों की दशा सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। चीनी मिल, कपास उद्योग और डेयरी सेक्टर के लिए कुछ नहीं किया है। पिछले वर्ष ‘प्रधानमंत्री कृषि सम्मान’ योजना की शुरुआत की गई थी। इसके लिए 75 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इसमें से अभी तक करीब 44 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

बहुत सारे किसानों को इस योजना की तीसरी किस्त नहीं मिली है। इसकी मौजूदा स्थिति के बारे में भी कुछ नहीं कहा गया है। इस बार भी इस मद में आवंटन उतना ही किया गया है। किसान को फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए दो योजनाएं हैं। प्रधानमंत्री कृषि आशा योजना और मार्केट इंटरवेंशन योजना। इन दोनों का पैसा घटा दिया गया है। प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत आवंटन 1,500 करोड़ से कम कर 500 करोड़ कर दिया गया है और मार्केट इंटरवेंशन का पैसा 3,000 करोड़ रुपये से कम कर 2,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के लिए सबसे बड़ी योजना है मनरेगा।

पिछले वर्ष इस योजना में 71 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए जिसे देखते हुए भी सरकार ने केवल 61,500 करोड़ रुपये इस योजना के लिए दिए हैं, जबकि पिछले काफी समय से हर तरफ यह बात हो रही है कि गांव के लोगों की आय बढ़ेगी तो मांग बढ़ेगी जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। बीते तीन-चार वर्षो से कहा जा रहा है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। लेकिन ऐसा होना वास्तव में आसान दिख नहीं रहा है।

वर्ष 2014-15 में कुल राष्ट्रीय आय में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 18.2 फीसद थी जो वर्ष 2018-19 में कम होकर 16.5 फीसद हो गई थी। आंकड़ों से यह जाहिर होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की बुनियाद दरक रही है। इस तस्वीर के सामने बजट में कृषि के लिए कुछ भी नहीं दिखता है। वित्त मंत्री की तमाम घोषणाओं के बाद क्या यह उम्मीद की जानी चाहिए कि किसानों की माली हालत सुधरेगी।

स्रोत: जागरण
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