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अब फ्लैटों के दाम घटाकर ग्राहकों को रिझाएगा आवास विकास परिषद, लखनऊ से योजना की शुरुआत

अब फ्लैटों के दाम घटाकर ग्राहकों को रिझाएगा आवास विकास परिषद, लखनऊ से योजना की शुरुआत


फ्लैट पर पांच से दस फीसद तक छूट दी जाएगी। एकमुश्त पैसा जमा करने पर पांच फीसद की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। खरीदारों की सुविधा के लिए 14 या 15 मार्च से लोन मेला भी साइट पर लगाया जाएगा। प्रयास है कि पांच-छह दिन में पंजीयन शुरू कर दिए जाएं। इस संबंध में जागरण की ये रिपोर्ट पढ़ें:

जागरण : लखनऊ, जेएनएन। रीयल एस्टेट क्षेत्र में आए ठहराव की बड़ी मार आवास एवं विकास परिषद पर भी पड़ी है। करोड़ों की लागत से बनीं आवासीय परियोजनाएं वर्षों से खरीदारों के इंतजार में हैं। अब इनकी बिक्री के लिए परिषद ने हाथ-पैर मारना तेज किया है। अव्वल तो अगले वित्तीय वर्ष में कहीं भी फ्लैट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। इसके अलावा कुछ योजनाओं में फ्लैट के दाम घटाए भी जाएंगे। यह निर्णय सोमवार को परिषद की 249वीं बोर्ड बैठक में लिया गया।

आवास एवं विकास परिषद मुख्यालय में बोर्ड बैठक प्रमुख सचिव आवास दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई। इसमें कुल 67 प्रस्ताव रखे गए। नौ को छोड़कर सभी पर निर्णय ले लिया गया। परिषद के आयुक्त अजय चौहान ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए परिषद के फ्लैट के दाम फ्रीज कर दिए गए हैं। किसी भी योजना में दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। बहुत सी योजनाओं में फ्लैट अभी बिके नहीं हैं, इसे देखते हुए फ्लैट के दाम घटाने का भी निर्णय लिया गया है।

फ्लैट पर पांच से दस फीसद तक छूट दी जाएगी। वहीं, एकमुश्त पैसा जमा करने पर पांच फीसद की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। खरीदारों की सुविधा के लिए 14 या 15 मार्च से लोन मेला भी साइट पर लगाया जाएगा। प्रयास है कि पांच-छह दिन में पंजीयन शुरू कर दिए जाएं। उल्लेखनीय है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण अपने फ्लैट के दाम पहले ही घटा चुका है।

लखनऊ की योजनाओं में ऐसे मिलेगी छूट

  • अवध विहार : मंदाकिनी, अलकनंदा, भागीरथी, गंगोत्री और नंदिनी एन्क्लेव में पांच फीसद छूट
  • वृंदावन योजना : आकाश, अरावली, गोवर्धन और नीलगिरी एन्क्लेव में पांच फीसद, जबकि एवरेस्ट एन्क्लेव में दस फीसद छूट
  • आम्रपाली योजना : 1 बीएचके और 2 बीएचके में दस फीसद छूट

आम्रपाली योजना के लिए निजी बिल्डर की तलाश

परिषद की आम्रपाली योजना भी अधूरी पड़ी है। 600 फ्लैट का निर्माण कार्य पूरा कराने पर बोर्ड बैठक में मंथन हुआ। फिलहाल इस सुझाव को गंभीरता से लिया गया है कि किसी प्राइवेट बिल्डर की तलाश कर पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर योजना पूरी कर ली जाए।

तीन वर्ष की लीज पर दिए जाएंगे कम्युनिटी हॉल

परिषद के प्रदेश भर में 31 सामुदायिक केंद्र (कम्युनिटी हॉल) हैं। अभी इनका संचालन ठीक न होने से विभाग को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पा रहा है। अब इन्हें तीन वर्ष की लीज पर दिए जाने का निर्णय हुआ है। आयुक्त चौहान ने बताया कि किराए पर नियंत्रण परिषद का ही होगा और संचालन निजी हाथों को सौंपेंगे।

जल्द आ सकती है 'जीरो पीरियड' नीति

नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अधूरी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए हाल ही में औद्योगिक विकास विभाग ने जीरो पीरियड नीति घोषित की है। इसके तहत विवाद या किसी वजह से योजना का काम अवरुद्ध रहने वाले समय को जीरो पीरियड घोषित कर उसका लाभ ग्राहक और बिल्डर को दिया जा रहा है। परिषद भी औद्योगिक विकास विभाग की जीरो पीरियड नीति को स्वीकार करेगा। इसे परिषद के अनुरूप तैयार कर घोषित किया जा सकता है।

परिषद ने निस्तारित किए वर्षों पुराने विवाद

आवास एवं विकास परिषद की भूमि और योजना से संबंधी कई मामले बीसियों साल से लंबित थे। ऐसे भी कई प्रकरण सोमवार को बोर्ड की बैठक में रखे गए। इन्हें निस्तारित करने के प्रस्ताव रखे गए, जिन्हें मंजूरी दे दी गई। इनमें अवध विहार योजना, लखनऊ के सेवई रेलवे ओवरब्रिज का काम लंबे समय से बाधित है। किसानों के साथ सहमति बन चुकी है कि निर्माणाधीन आरओबी के दायरे में आ रहे निर्माणों के बदले उतनी भूमि किसानों को अन्यत्र दी जाएगी।

वहीं, वृंदावन योजना एक, दो, तीन और चार में किसानों को अर्जित भूमि के बदले 60 वर्गमीटर तक के भूखंड आवंटित किए जाएंगे। बलरामपुर बहराइच मार्ग भूमि विकास और गृह स्थान योजना के लिए लैंडपूलिंग के जरिए भूमि अर्जन किया जाएगा। वाराणसी स्थित पांडेयपुर योजना में किसानों को अधिगृहीत भूमि के सापेक्ष पचास फीसद विकसित भूमि दी जाएगी। यह प्रकरण बीस वर्ष से लंबित था। इसी तरह आगरा की ट्रांसयमुना योजना द्वितीय चरण में समाहित 380.46 वर्गमीटर भूमि पर हुए निर्माणों को वर्तमान आवंटित भूमि दर पर निस्तारित किया जाएगा। इस तरह 25 वर्ष पुराने विवाद खत्म किया गया।

इन प्रस्तावों पर भी लगी मुहर

  • अवध विहार योजना में अवध शिल्पग्राम के पास पांच हजार लोगों की क्षमता का ऑडिटोरियम बनाया जाएगा। अनुमानित लागत 250 करोड़ रुपये है।
  • परिषद के भूमि अर्जन के तकनीकी बिंदुओं के समाधान के लिए प्रतिनियुक्ति पर तहसीलदारों की तैनाती की जाएगी।
  • परिषद के जो भी अधिकारी-कर्मचारी विभाग को वित्तीय क्षति पहुंचाएंगे, अब उनसे क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। गाजियाबाद की वसुंधरा योजना में विभाग को एक करोड़ 20 लाख रुपये के नुकसान की भरपाई संबंधित अधिकारियों और कंपनी से करने का निर्णय हुआ है।

स्रोत : जागरण
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