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Rashtriya Krishi Vikas Yojana: जानें क्या है राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

Rashtriya Krishi Vikas Yojana: जानें क्या है राष्ट्रीय कृषि विकास योजना


केंद्र सरकार ने कृषि और इसके सम्बद्ध क्षेत्र के विकास की धीमी रफ़्तार को देखते हुए 29 मई 2007 को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की शुरुआत की. जिसका मकसद ये था कि कृषि और कृषि सम्बंधित सभी क्षेत्र का समग्र विकास. इसके लिए प्रमुख खाद्य फसलों का समेकित विकास, मृदा स्वास्थ्य के संवर्धन से सम्बंधित क्रियाकलाप, कृषि यंत्रीकरण, बंजर भुमियों, नदी घाटियों का समेकित विकास इत्यादि. इस सम्बन्ध में और अधिक विस्तार से जानने के लिए पत्रिका के इस रिपोर्ट को पढ़ें:

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नई दिल्ली 
पत्रिकाकृषि और सम्बन्ध क्षेत्रों में धीमी वृद्धि से चिंतित और कृषि को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 29 मई 2007 राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की शुरूआत की थी। इस योजना का मकसद कृषि जलवायवीय , प्राकृतिक संसाधन और प्रोधोगिकी को ध्यान में रखते हुए कृषि विकास करना है। आरकेवीवाई का उधेश्य कृषि एवं संबध्द क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिचित करते हुए 12वीं योजना अवधि के दौरान वांछित वार्षिक वृद्धि दर को प्राप्त करना और उसको बनाये रखना है।

योजना के मुख्य उद्येश्य

राष्ट्रिय कृषि विकास योजना का मुख्य उदेश्य कृषि एवं संबध क्षेत्रों में सार्वजानिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को प्रोत्साहित करना है वहीं, राज्यों को कृषि एवं संबध योजनाओं के नियोजन एवं निष्पादन की प्रक्रिया में शिथिलता एवं स्वायतता प्रदान करना और कृषि जलवायुवीय स्थितियों, प्रोधौगिकी एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर जिला एवं राज्यों हेतु कृषि योजनाए बनाई जाएं, भी प्रमुख उधेश्य है।

इसके आलावा स्थानीय आवश्यकताएं /फसलों /प्राथमिकताओं को राज्य की कृषि योजनओं में ठीक प्रकार से प्रदर्शित किया जाए, केंद्रीत कार्यकलापों के माध्यम से महत्वपूर्ण फसलों में उपज अंतर को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करना, कृषि एवं संबध क्षेत्रों में किसानों को अधिकतम लाभ प्रदान करना, कृषि एवं संबध क्षेत्रों के विभिन्न घटकों का समग्र प्रकार से समाधान करके उत्पादन एवं उत्पादकता में परिवर्तन लाना आदि इस योजना के मकसद हैं।

योजना के प्रमुख क्षेत्र 

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में गेहूं, धन, छोटे कदन्न, दालों, तिलहनो, मोटे अनाज, जैसी प्रमुख फसलों का समेकित विकास, मृदा स्वास्थ्य के संवधर्न से संबंधित क्रियाकलाप, कृषि यंत्रीकरण, पनधारा क्षेत्रों, बंजर भूमियों, नदी घाटियों का समेकित विकास, राज्य बीज फार्मो को सहायता, पनधारा क्षेत्रों के अन्दर तथा बाहर वर्षा सिंचित फार्मिंग प्रणाली का विकास, मंडी विकास और मंडी अवसंरचना का सुदृढीकरण, भूमि सुधारों के लाभानुभोगियों के लिए विशेष योजनाएं, विस्तार सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए अवसंरचना को मजबूत बनाना, बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने सम्बन्धी क्रियाकलाप, पशुपालन एवं मत्स्यिकी विकाय क्रियाकलाप, परियोजनाओं की पूर्णता की अवधारणा शुरू करना है।

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